आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारा पूरा दिन स्मार्टफोन स्कॉल करते हुए या लैपटॉप पर काम करते हुए ही बीतता है। रात को सोने से पहले भी हमारी नजरें फोन के स्क्रीन पर ही रहती हैं। इसके कारण रात को नींद न आना या बार-बार नींट टूटने की समस्या होने लगती है।
इस परेशानी से बचने में डिजिटल सनसेट (Digital Sunset) आपकी मदद कर सकता है। आइए जानें यह होता क्या है और इससे कैसे आपको फायदा मिल सकता है।
क्या है डिजिटल सनसेट?
इसका सीधा मतलब है, सोने से एक लगभग एक या दो घंटे पहले अपने सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, जैसे- मोबाइल फोन, टैबलेट, टेलीविजन और लैपटॉप को बंद कर देना। जिस तरह प्रकृति में सूरज ढलने के बाद अंधेरा छा जाता है और दुनिया शांत होने लगती है, उसी तरह डिजिटल सनसेट आपके दिमाग को यह संकेत देता है कि अब बाहरी दुनिया से कटकर आराम करने का समय आ गया है।
स्क्रीन टाइम और नींद का कनेक्शन
हमारे शरीर की एक इंटरनल क्लॉक होती है जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। जब शाम होती है और रोशनी कम होने लगती है, तो हमारा दिमाग मेलाटोनिन हार्मोन रिलीज करना शुरू कर देता है। यह हार्मोन हमारे शरीर को संकेत देता है कि अब आराम करने और सोने का समय हो गया है।
हालांकि, स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे दिमाग को कन्फ्यूज कर देती है कि अभी सोने का वक्त नहीं हुआ है। इसके कारण दिमाग एक्टिव रहता है और मेलाटोनिन सीक्रेशन रुक जाता है या कम हो जाता है। इस वजह से रात को अच्छी नींद नहीं आती या नींद आने में काफी समय लगता है और अगले दिन थकान महसूस होती है।
डिजिटल सनसेट के फायदे
गहरी और बेहतर नींद- जब आप सोने से कम से कम 1-2 घंटे पहले स्क्रीन बंद कर देते हैं, तो शरीर को प्राकृतिक रूप से मेलाटोनिन बनाने का समय मिलता है। इससे न केवल जल्दी नींद आती है, बल्कि नींद गहरी भी होती है।
मानसिक शांति और कम तनाव- सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन और खबरें अक्सर तनाव और एंग्जायटी पैदा करती हैं। डिजिटल सनसेट आपको इससे दूर होने में मदद करता है, जिससे मन शांत होता है।
आंखों को आराम- दिन भर स्क्रीन देखने से आंखों पर जो दबाव पड़ता है, उसे कम करने के लिए यह ब्रेक बहुत जरूरी है।
खुद के लिए समय- स्क्रीन बंद होने पर आपके पास किताबें पढ़ने या परिवार के साथ बातचीत करने का समय होता है, जो रिश्तों और व्यक्तिगत विकास के लिए फायदेमंद है।
इसे कैसे अपनाएं?
समय तय करें- सोने से कम से कम 60 मिनट पहले डिजिटल सनसेट का समय तय करें।
विकल्प ढूंढें- स्क्रीन की जगह किताब पढ़ने, हल्का म्युजिक सुनने या मेडिटेशन की आदत डालें।
फोन को दूर रखें- चार्जिंग पॉइंट को बिस्तर से दूर किसी दूसरे कमरे में रखें ताकि आप बार-बार फोन न देखें।
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