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ईरानी हमलों से मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर भारी नुकसान, 16 सैन्य अड्डे प्रभावित

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वाशिंगटन, 2 मई। मध्य पूर्व में अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से जारी तनावपूर्ण संघर्ष के दौरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 8 देशों में फैले कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य अड्डे इस संघर्ष से प्रभावित हुए हैं, जिनमें से कुछ की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि उनका उपयोग फिलहाल संभव नहीं है।

     CNN की जांच में खुलासा हुआ है कि क्षतिग्रस्त ठिकाने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे का बड़ा हिस्सा हैं। एक संसदीय सहयोगी के अनुसार, नुकसान अलग-अलग स्तर का है—कुछ अड्डों को पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है, जबकि कुछ को उनकी रणनीतिक अहमियत के चलते मरम्मत कर दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।

     रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर बताया गया है कि ईरान ने विशेष रूप से अमेरिकी रडार सिस्टम, संचार नेटवर्क और विमानों को निशाना बनाया। ये सभी संसाधन न केवल अत्यंत महंगे हैं बल्कि सीमित संख्या में उपलब्ध भी हैं, जिससे नुकसान की भरपाई आसान नहीं मानी जा रही।

    एक कांग्रेस सहयोगी ने बताया कि हमलों में उन ठिकानों को प्राथमिकता से निशाना बनाया गया, जो लागत और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण थे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी रडार सिस्टम इस क्षेत्र में सबसे महंगे और संवेदनशील संसाधनों में शामिल हैं।

     वहीं, पेंटागन के कार्यवाहक नियंत्रक जूल्स हर्स्ट III के अनुसार, इस पूरे संघर्ष में अब तक अमेरिकी करदाताओं पर लगभग 25 अरब डॉलर का वित्तीय बोझ पड़ चुका है। The New York Times की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय की मरम्मत पर ही करीब 200 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है।

     इसके अलावा American Enterprise Institute के एक स्वतंत्र आकलन में बताया गया है कि ईरानी हमलों में कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस, कतर के अल उदीद एयर बेस के रनवे और उत्तरी इराक के एक सैन्य ठिकाने की गोला-बारूद भंडारण सुविधा को भी निशाना बनाया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।