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मुर्गियों पर सियासी मातम, इंसानों पर खामोशी ! ‘डीजे बनाम पोल्ट्री’ ने मचाया सियासी शोर

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                                                (संतोष यादव)

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में इन दिनों न्याय की नई परिभाषा लिखी जा रही है। जहां इंसानों की चीखें दब जाती हैं, वहां मुर्गियों की खामोशी भी सियासत को हिला देती है। यहां पर हुई मुर्गियों की मौत का मामला अब पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे पोस्ट और प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। एक ओर जहां पोल्ट्री फार्म मालिक को लखनऊ ले जाकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मुलाकात कराने का श्रेय लेने वाले सदर सीट से विधायक रहे अरुण वर्मा चर्चा में थे, वहीं सपा से जुड़े कई नेताओं ने विरोध में सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया। सपाइयों बीच ही विरोध के स्वर मुखर हैं।

          लोग अपनी–अपनी भाषा शैली में पूर्व विधायक की कारस्तानी पर तंज कस रहे हैं। सोशल मीडिया पर उठे सवालों ने उनकी स्थिति असहज कर दी है। बताया जा रहा है कि बढ़ती आलोचना के बीच पूर्व विधायक अरुण वर्मा ने लखनऊ में सपा प्रमुख से डीजे मालिक कवी यादव की भी मुलाकात कराकर स्थिति संभालने की कोशिश की। इसे राजनीतिक हलकों में ‘डैमेज कंट्रोल’ के तौर पर देखा जा रहा है। उधर, सत्ता पक्ष ने भी इस मुद्दे को लपक लिया। सरकार में मंत्री संजय निषाद के बेटे और निषाद पार्टी के पूर्व सांसद प्रवीण निषाद ने सोशल मीडिया के जरिए पोस्ट में पूरे प्रकरण को पीडीए के अपमान, सम्मान से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी एवं मुखिया पर तंज कसा।

        वहीं सदर से विधायक राज प्रसाद उपाध्याय ने पोस्ट किया कि, सपा सुप्रीमो मुर्गी एवं डीजे की राजनीति’ में गहरी रुचि ले रहे हैं। पूर्व विधायक और उनकी पार्टी के नेता गंभीर जन समस्याओं को छोड़कर केवल फोटो खिंचवाने के लिए नए-नए बहाने ढूंढ रहे हैं। गौरतलब है कि, इसौली विधानसभा क्षेत्र के दरियापुर गांव में 25 अप्रैल को बब्बन विश्वकर्मा के घर लड़की की शादी थी। कुड़वार से आई बारात में ‘कवी यादव डीजे’ का जलवा था। बारातियों के ठुमकों के बीच पास के एक पोल्ट्री फार्म के मालिक साबिर का आरोप है कि डीजे की तेज आवाज़ से उनकी एक सौ चालीस मुर्गियों की मौत हो गई। समझौते के नाम पर पोल्ट्री फार्म मालिक ने डीजे संचालक से 15 हजार रुपये ले लिए। मुर्गियों की इस ‘अचानक शहादत’ ने मामला सीधे थाने तक पहुंचा दिया। पुलिस ने भी तत्परता दिखाते हुए दरोगा भरत सिंह की तहरीर पर डीजे संचालक पर मुकदमा दर्ज कर लिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

      मामले में सियासी तड़का तब लगा जब सदर के पूर्व विधायक अरुण वर्मा, मुर्गियों के दुख से व्यथित होकर, पोल्ट्री फार्म मालिक को लेकर सीधे सपा सुप्रीमो तक पहुंच गए। नतीजा, नुकसान की भरपाई भी हो गई। डीजे मालिक पर हुआ  मुकदमा, और पोल्ट्री फार्म मालिक को मिले मुआवजा ने नई बहस को जन्म दे दिया। नेताओं की इंसानी त्रासदियों पर चुप्पी और मुर्गियों के मुद्दे पर सक्रियता ने अब पार्टी के अंदर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय युवा सपाई तंज कस रहे हैं, कि यहां आदमी मरे तो फाइल भी नहीं खुलती, लेकिन मुर्गी मरे तो सीधे अखिलेश यादव तक खबर पहुंच जाती है। एक बुजुर्ग सपाई कहते हैं कि, इंसानों की जान से ज्यादा कीमत मुर्गियों की हो गई है।

      इसौली इलाके में हाल ही में राहुल यादव नामक एक युवक की बेरहमी से हत्या हुई थी, उसका परिवार न्याय की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसकी आवाज़ सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुंच सकी। वहां न कोई दौड़ा, न कोई मुआवजा आया, न ही कोई ‘विशेष मुलाकात’ हुई। यूथ के एक पदाधिकारी कहते हैं कि, सदर विधान सभा के साटा गांव में हिमांशु वर्मा की हत्या, पेमापुर गांव में विकास यादव की हत्या, लंभुआ के मदार डीह निवासी सुनील यादव हत्याकांड में संवेदना के पोस्ट लिखकर डिलीट करने वाले पूर्व विधायक अरुण वर्मा इसी विधान सभा के रुचेंद्र चौहान की मौत पर भी चुप्पी साधे रहे, लेकिन मुर्गी प्रकरण पर डीजे मालिक एवं पोल्ट्री फार्म मालिक के साथ सपा सुप्रीमो से मिलाकर वाहवाही ले रहे हैं।

      विडंबना देखिए, जिस इसौली विधानसभा में यह मुर्गी प्रकरण सुर्खियां बटोर रहा है, वहां के विधायक ताहिर खान सपा से हैं। ताहिर जिले में इकलौते सपा विधायक हैं, लेकिन मुर्गी प्रकरण में सपा सुप्रीमो से दो बार हुई मुलाकात में उन्हें शामिल नहीं किया गया। अब यह समझना मुश्किल हो गया है कि यह मामला ‘डीजे की आवाज़’ का है, ‘मुर्गियों की मौत’ का है या फिर ‘सियासत की संवेदनशीलता’ का। फिलहाल मुर्गी एवं डीजे की आवाज अब कानों से ज्यादा राजनीति में गूंज रहा है।