रायपुर, 09 मई। छत्तीसगढ़ में स्वीकृत विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए मुख्य सचिव श्री विकासशील ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भू-अर्जन और फॉरेस्ट क्लीयरेंस जैसी प्रक्रियाओं को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ जल्द मिल सके।
मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की कार्यकारिणी समिति की बैठक में मुख्य सचिव ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में परियोजनाओं से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने पर जोर दिया गया।
बैठक में गरियाबंद जिले की महत्वाकांक्षी पैरी-कोडार लिंक नहर परियोजना पर चर्चा हुई। इस योजना के तहत सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय तक पाइपलाइन लिंक नहर का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के जरिए महानदी की सहायक पैरी नदी के अतिरिक्त जल का उपयोग पेयजल, निस्तारी और औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जाएगा। इससे गरियाबंद और महासमुंद जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई सुविधा विकसित होगी।
इसके अलावा रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में प्रस्तावित मोहमेला-सिरपुर बैराज परियोजना की भी समीक्षा की गई। महानदी पर बनने वाले इस बैराज से लगभग 1800 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्वहन सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही पर्यटन, नौकायन और आवागमन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना जताई गई।
बैठक में बस्तर क्षेत्र की महत्वपूर्ण मटनार बहुउद्देशीय परियोजना और देउरगांव उद्वहन बैराज परियोजना पर भी चर्चा हुई। इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित मटनार परियोजना को बस्तर के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। उद्वहन प्रणाली आधारित होने के कारण इस परियोजना में विस्थापन और पुनर्वास की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे स्थानीय पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर असर कम पड़ेगा। वहीं जगदलपुर के समीप प्रस्तावित देउरगांव उद्वहन बैराज से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।




