रायपुर, 15 मई। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि राज्य की लगभग 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, लेकिन लगातार कृषि भूमि के संकुचित होने के कारण अब कम जमीन में अधिक उत्पादन की दिशा में कार्य करना समय की आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए वैल्यू एडिशन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग बेहद जरूरी है।
राज्यपाल श्री डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कृषि मंत्री रामविचार नेताम एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व निदेशक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित समारोह में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के छात्र-छात्राओं को उपाधियां और पदक प्रदान किए गए। विभिन्न संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण, 7 रजत और 2 कांस्य पदक दिए गए। इसके अलावा 128 शोधार्थियों को पीएचडी, 518 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर तथा 1234 विद्यार्थियों को स्नातक की उपाधि प्रदान की गई।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं बल्कि जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक होता है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थापना के समय यहां सीमित विषय उपलब्ध थे, लेकिन समय के साथ शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में व्यापक विस्तार हुआ है।
उन्होंने कहा कि कृषि अब केवल पारंपरिक व्यवस्था नहीं रह गई है, बल्कि विज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता से संचालित क्षेत्र बन चुकी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, सैटेलाइट मैपिंग, जलवायु अनुकूल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव, डिजिटल उपकरणों से मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, मोबाइल ऐप के जरिए किसान परामर्श और ई-नाम बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन अब राज्य को उच्च गुणवत्ता वाले बासमती और सुगंधित धान उत्पादन की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। इससे किसानों को बेहतर बाजार और अधिक लाभ मिल सकेगा। उन्होंने हाइड्रोपोनिक्स और प्राकृतिक खेती को भी भविष्य की संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, फल-सब्जी और मोटे अनाजों के उत्पादन को भी बढ़ावा दे रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि उपकरणों की उपलब्धता और मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीकों को खेती से जोड़ते हुए किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सेतु बनने का आह्वान किया।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की सबसे अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं और राज्य सुगंधित धान उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फल, फूल और मसाला उत्पादन की भी अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का आग्रह किया।
समारोह में दीक्षांत भाषण डॉ. अशोक कुमार सिंह ने दिया, जबकि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और गतिविधियों पर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। समारोह में विधायक अनुज शर्मा सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, प्राध्यापक, अधिकारी, विद्यार्थी और उनके अभिभावक उपस्थित रहे।




