रायपुर, 29 मई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने निवास कार्यालय में पद्मश्री सम्मानित समाजसेवी दंपति डॉ. सुनीता गोडबोले और डॉ. रामचंद्र गोडबोले से मुलाकात कर बस्तर और जनजातीय समाज के बीच चार दशकों से अधिक समय से किए जा रहे उनके सेवा कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोडबोले दंपति का पद्मश्री सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के जनजातीय समाज का सम्मान है।
मुलाकात के दौरान गोडबोले दंपति ने कहा कि उन्हें बस्तर और यहां के लोगों से गहरा लगाव है तथा वे गोंडी और हल्बी भाषाओं में लोगों से संवाद करते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे जनजातीय समाज और स्थानीय संस्कृति के प्रति उनके गहरे समर्पण का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गोडबोले दंपति ने अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में निःशुल्क उपचार, कुपोषण, टीबी, मलेरिया और अन्य बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ शिक्षा और नशामुक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कठिन दौर में भी दंपति ने सेवा का मार्ग नहीं छोड़ा और जनजातीय समाज के बीच विश्वास और आत्मीयता बनाए रखी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में विकास और विश्वास की नीति पर कार्य कर रही है। उन्होंने “नियद नेल्ला नार” योजना और सुरक्षा कैंपों को “सेवा डेरा” के रूप में विकसित करने की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
चर्चा के दौरान गोडबोले दंपति ने संत गहिरा गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय जीवन मूल्यों से अपने जुड़ाव की भी जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उनकी सेवा और समर्पण की भावना समाज में नई प्रेरणा और जागरूकता का संचार करेगी।




