अच्छी सेहत के लिए खूब पानी पीने की सलाह दी जाती है, खासकर गर्मी के मौसम में। लेकिन क्या यही पानी हमारी सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है?
दरअसल, जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। जब आप अपने शरीर की जरूरत से बहुत ज्यादा पानी पी लेते हैं, तो यह एक गंभीर स्थिति को जन्म देता है जिसे वॉटर इन्टॉक्सिकेशन कहा जाता है। आइए समझते हैं कि ज्यादा पानी पीना कैसे नुकसानदेह हो सकता है।
क्या है वॉटर इन्टॉक्सिकेशन?
वॉटर इन्टॉक्सिकेशन एक ऐसी स्थिति है जब आपके शरीर में उसकी जरूरत से कहीं ज्यादा पानी इकट्ठा हो जाता है। आमतौर पर, जब हम पानी पीते हैं, तो हमारा शरीर पसीने या यूरीन के जरिए एक्स्ट्रा पानी को बाहर निकाल देता है, लेकिन जब पानी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है, तो शरीर में एक तरह का इंबैलेंस पैदा हो जाता है। इस स्थिति में शरीर प्राकृतिक रूप से उस एक्स्ट्रा पानी को बाहर नहीं निकाल पाता है।
शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है?
जब आप बहुत कम समय में बहुत ज्यादा मात्रा में पानी पी लेते हैं, तो इसका सीधा असर आपके खून और सेल्स पर पड़ता है।
सोडियम का स्तर कम होना- जरूरत से ज्यादा पानी आपके खून को पतला कर देता है। इसके कारण शरीर में मौजूद जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा तेजी से घटने लगती है। इसमें सबसे ज्यादा कमी सोडियम के स्तर में आती है। खून में सोडियम का स्तर सामान्य से कम होने की इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है।
सेल्स में सूजन आना- सोडियम हमारे शरीर में सेल्स के अंदर और बाहर पानी के बैलेंस को बनाए रखने का काम करता है। जब खून में सोडियम का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो पानी बैलेंस बनाने के लिए शरीर की सेल्स के अंदर जाने लगता है। नतीजा यह होता है कि शरीर के सेल्स पानी सोखकर फूलने लगते हैं।
दिमाग पर होता है असर- शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में दिमाग के सेल्स में सूजन आना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। पानी की ज्यादा मात्रा के कारण दिमाग के सेल्स में सूजन आती है, तो खोपड़ी के अंदर का दबाव बहुत बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ दबाव दिमाग के काम करने के तरीके को सीधे प्रभावित करता है। इसके कारण व्यक्ति की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगती है। मरीज के व्यवहार में बदलाव आने लगता है, उसके होश और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और शरीर के मूवमेंट पर से कंट्रोल खोने लगता है।




