(सन्तोष यादव)
सुलतानपुर, 13 जून। गोमती नदी के गुदरा घाट पर निर्माणाधीन सेतु की एक बीम में दरार आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि सेतु निगम ने इसे तकनीकी कारणों से हुई घटना बताते हुए स्पष्ट किया है कि बीम की थर्ड पार्टी जांच कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर इसे बदलकर नई बीम स्थापित की जाएगी।
लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र के सूरापुर-विजेथुआ-गुदरा-कोइरीपुर ग्रामीण मार्ग पर बन रहा गोमती सेतु क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में शामिल है। करीब साढ़े सात वर्षों से लोग इसके निर्माण पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में निर्माणाधीन पुल की बीम में दरार की खबर ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक प्रशांत कुमार सिंह के अनुसार गुदरा घाट पर 196.88 मीटर लंबे सेतु का निर्माण किया जा रहा है। पुल में कुल छह स्पान प्रस्तावित हैं, जिनमें से पांच स्पान पर डैक स्लैब स्तर तक का कार्य पूरा हो चुका है। जिस बीम में दरार आई है, वह पी-3 और पी-4 स्पान के बीच अपस्ट्रीम हिस्से की है।
उन्होंने बताया कि संबंधित बीम में कुल पांच केविल (केबल) लगाए जाने हैं। इनमें से दो केविल की प्री-स्ट्रेसिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी। 11 जून को तीसरे केविल की प्री-स्ट्रेसिंग के दौरान प्रयुक्त हाइड्रोलिक जैक अचानक फेल हो गया, जिससे बीम पर अपेक्षा से अधिक दबाव पड़ गया और उसमें दरार आ गई।
सेतु निगम का कहना है कि प्रभावित बीम के केविल का तनाव रिलीज कर विशेष ज्वाइंट फिलर मैटेरियल से दरार की मरम्मत कराई जाएगी। इसके बाद स्वतंत्र एजेंसी से थर्ड पार्टी गुणवत्ता परीक्षण कराया जाएगा। यदि जांच में बीम निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरती है तो उसे हटाकर नई बीम स्थापित की जाएगी।
हालांकि स्थानीय लोगों के मन में कई सवाल अभी भी बने हुए हैं। उनका कहना है कि यदि केवल जैक की तकनीकी खराबी के कारण घटना हुई है तो बीम में इतनी गंभीर दरार कैसे आ गई। विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्री-स्ट्रेसिंग पुल निर्माण की अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जिसमें उपकरणों की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर विपक्षी स्वर भी मुखर होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माणाधीन पुल की बीम में ही दरार दिखाई दे रही है तो भविष्य में उसकी मजबूती को लेकर आशंकाएं स्वाभाविक हैं।
फिलहाल पूरे मामले में अब सभी की निगाहें प्रस्तावित थर्ड पार्टी जांच पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि यह केवल एक तकनीकी दुर्घटना थी या फिर निर्माण प्रक्रिया में किसी प्रकार की गंभीर कमी रही है। गौरतलब है कि इस सेतु के पूरा होने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों की आवाजाही आसान होगी और यातायात व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।
डीएम ने बनाई जांच टीम, बीम में आई दरारों की करेगी गहन जांच
जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने बताया कि, पुल अभी निर्माणाधीन है, इसलिए इसके निर्माण की प्रत्येक तकनीकी प्रक्रिया की गहन जांच कराई जाएगी। एडीएम (एफआर) की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की गई है। टीम में सेतु निगम के अलावा अन्य विभागों के तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। यह टीम मौके पर पहुंचकर पुल की गुणवत्ता, निर्माण मानकों और बीम में आई दरारों की गहन जांच करेगी तथा अपनी विस्तृत रिपोर्ट दस दिन के अंदर प्रशासन को सौंपेगी।




