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नकटी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर विधानसभा में हंगामा

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रायपुर 15 जुलाई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में नकटी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कार्रवाई को असंवैधानिक और अमानवीय बताया। हालांकि प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद विपक्षी विधायक सदन के गर्भगृह में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि मानसून के दौरान नकटी क्षेत्र में 85 परिवारों के मकान तोड़ दिए गए, जिससे कई लोग बेघर हो गए। कांग्रेस का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचाया गया।

    कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सरकार से सवाल किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बारिश के मौसम में ही क्यों की गई। उन्होंने दावा किया कि अभियान के दौरान चार गाय और एक बछिया की भी मौत हुई। वहीं, विधायक कवासी लखमा ने कहा कि प्रशासन यदि चाहता तो कुछ महीने बाद भी कार्रवाई कर सकता था, लेकिन बरसात के बीच अभियान चलाकर प्रभावित परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी गईं।

    विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि पूरी कार्रवाई कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है। उन्होंने बताया कि अतिक्रमणकारियों को पहले से विधिवत नोटिस जारी किए गए थे और पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की गई थी तथा उनके घरेलू सामान को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष के वक्तव्य पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। राजस्व मंत्री ने यह भी कहा कि यह कहना सही नहीं है कि कार्रवाई के दौरान क्षेत्र भारी वर्षा से प्रभावित था।

    स्थगन प्रस्ताव अग्राह्य होने के बाद कांग्रेस विधायक सदन के गर्भगृह में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। विपक्ष ने मांग की कि इस पूरे मामले पर सदन की कार्यवाही रोककर विस्तृत चर्चा कराई जाए।