रायपुर, 4 अगस्त। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में प्रक्रिया को तेज करते हुए आम जनता, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों से सुझाव आमंत्रित कर रही है। सरकार का उद्देश्य धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की रूपरेखा तैयार करना है।
इस उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने नागरिकों, शासकीय एवं गैर-शासकीय संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, विभिन्न समुदायों तथा राजनीतिक दलों से आगामी 15 अक्टूबर तक अपने सुझाव, अभिमत और लिखित प्रस्तुतियां देने की अपील की है। समिति इन सुझावों के आधार पर राज्य में यूसीसी लागू करने की संभावनाओं और उसके स्वरूप का अध्ययन करेगी।
समिति राज्य में व्यक्तिगत सिविल मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों और व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा भी करेगी, ताकि एक ऐसी व्यवस्था तैयार की जा सके जो संविधान की भावना के अनुरूप हो और सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू हो।
राज्य सरकार ने इस कार्य के लिए उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति को यूसीसी के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर अपनी अनुशंसाएं सरकार को सौंपनी हैं।
गौरतलब है कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। इसके अलावा गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी यूसीसी लागू किए जाने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। अब छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में आगे बढ़ते हुए जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है।




