रायपुर, 11 अगस्त। छत्तीसगढ़ आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसियेशन के अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री से प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस का निर्धारण प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति (AFRC) के माध्यम से सुनिश्चित कराने की मांग की है।
श्री ठाकुर ने यहां जारी बयान में बताया कि प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रभात शास्त्री ने 13 सितंबर 24 को छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को पत्र जारी कर स्पष्ट किया था कि प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस का निर्धारण संबंधित समिति से ही कराने के लिए निर्देशित किया जाए तथा इसकी जानकारी समिति को उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि इसके बाद 23 जून 25 को छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। ठाकुर का आरोप है कि इसके बावजूद फीस निर्धारण को लेकर शासन स्तर पर बार-बार मार्गदर्शन लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है।
AFRC, निजी विश्वविद्यालय आयोग और तकनीकी शिक्षा संचालनालय की भूमिका पर सवाल
संजय ठाकुर के मुताबिक, AFRC के अध्यक्ष की ओर से भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस निर्धारित करना समिति के अधिकार क्षेत्र में आता है। वहीं निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सचिव ने प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पत्र जारी कर फीस का निर्धारण AFRC से कराने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने दावा किया कि तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने भी मंत्रालय को स्पष्ट प्रतिवेदन देकर बताया है कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस का निर्धारण AFRC द्वारा किया जाना चाहिए।
श्री ठाकुर ने कहा कि जब संबंधित स्तरों से स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है, तो अब शासन को बिना किसी और देरी के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर फीस निर्धारण की व्यवस्था को लागू करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में हो रही देरी से छात्रों और उनके अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
2008 में हुआ था AFRC का गठन
श्री ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2008 में केंद्र शासन के निर्देश पर राज्यों में प्रवेश एवं फीस विनियामक समितियों (AFRC) के गठन की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य निजी एवं शासकीय संस्थानों में संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करना था।
उन्होंने कहा कि MBA, B.E., B.Pharm, B.Tech, B.Ed., M.Ed., MCA, B.P.Ed., M.P.Ed. और B.Arch जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में फीस निर्धारण को लेकर स्पष्ट और विधिसम्मत व्यवस्था जरूरी है। ठाकुर ने सवाल उठाया कि व्यवस्था लागू हुए करीब 18 वर्ष बीतने के बावजूद इसका प्रभावी क्रियान्वयन क्यों नहीं हो पा रहा है।
छात्रों के शोषण का लगाया आरोप
संजय ठाकुर ने कहा कि छात्र लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस तय करने की प्रक्रिया में एकरूपता, पारदर्शिता और विधिसम्मत व्यवस्था लागू की जाए। उनका आरोप है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को वर्षों से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझाए जाने के कारण लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए निजी विश्वविद्यालयों के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस AFRC के माध्यम से निर्धारित कराने और इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की।




