रायपुर, 11 सितम्बर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण सियासी घटनाक्रम उस समय सामने आया जब सतनामी समाज के प्रमुख धर्मगुरु गुरु बालदास के बड़े बेटे और प्रदेश सरकार में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब ने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में रायपुर स्थित उनके निवास पर आयोजित तीजा-पोरा कार्यक्रम के दौरान ढालदास साहेब का कांग्रेस में प्रवेश हुआ। भूपेश बघेल ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें कांग्रेस का गमछा पहनाया।
गुरु ढालदास साहेब के कांग्रेस में शामिल होने को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि उनके छोटे भाई गुरु खुशवंत साहेब मौजूदा भाजपा सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में एक ही परिवार के दो प्रमुख सदस्यों का अलग-अलग राजनीतिक दलों में होना छत्तीसगढ़ की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।
गुरु बालदास का सतनामी समाज में प्रभाव माना जाता है और उनके परिवार की सामाजिक एवं धार्मिक पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से ढालदास साहेब के कांग्रेस प्रवेश को केवल व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय के तौर पर नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि इसका सतनामी समाज और विशेष रूप से मध्य छत्तीसगढ़ की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।
भाजपा छोड़ने की वजह पर भी दिया बयान
कांग्रेस में प्रवेश के बाद ढालदास साहेब ने भाजपा छोड़ने के कारणों को लेकर भी अपनी बात रखी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा कि उनका निर्णय बातचीत के बाद लिया गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कांग्रेस उन्हें उनके भाई गुरु खुशवंत साहेब के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारती है, तो वे चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे।
ढालदास साहेब ने भाजपा पर गुरु घासीदास की विचारधारा के अनुरूप काम नहीं करने का आरोप भी लगाया है। उनके इस बयान ने उनके कांग्रेस प्रवेश को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है।
गुरु परिवार के राजनीतिक समीकरण पर नजर
गुरु बालदास के परिवार की छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज में महत्वपूर्ण सामाजिक-धार्मिक भूमिका रही है। एक ओर गुरु खुशवंत साहेब भाजपा सरकार में मंत्री के रूप में सक्रिय हैं, वहीं अब उनके बड़े भाई ढालदास साहेब कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे में आने वाले समय में दोनों भाइयों की राजनीतिक भूमिका और उनके अलग-अलग दलों में होने से बनने वाले समीकरण पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ सतनामी समाज की भी नजर रहेगी। खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए ढालदास साहेब के कांग्रेस में शामिल होने को कांग्रेस की रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।




