नई दिल्ली, 11 सितम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और जन-जन के संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। इस वर्ष यह दोनों नेताओं की दूसरी मुलाकात है। इससे पहले दोनों की 31 अगस्त को बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी।
मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस आर्थिक संबंधों को और गति देने तथा व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर बताया कि बातचीत में व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, 2030 के आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के क्रियान्वयन तथा बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने माना कि मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत-रूस संबंधों ने मजबूती और लचीलापन प्रदर्शित किया है।
दोनों नेताओं ने 9 से 11 सितम्बर तक भारत में पहली बार आयोजित रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इनोप्रोम इंडिया’ का भी दौरा किया। उन्होंने प्रदर्शनी में शामिल प्रतिभागियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत की। भारत और रूस ने इस आयोजन को दोनों देशों के बीच व्यापार और औद्योगिक सहयोग को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा है।
वार्ता में भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत दोनों देशों के सहयोग पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। इसके साथ ही पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों सहित प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा की गई। इन संघर्षों का समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि संघर्षों के समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति से होकर गुजरता है तथा भारत शांति प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भी सुरक्षित समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा को वैश्विक व्यापार के लिए जरूरी बताया। वहीं राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में गहरे और व्यापक संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं तथा पुराने आर्थिक केंद्रों की जगह नए विकास केंद्र उभर रहे हैं। उन्होंने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के साथ विश्वसनीय लॉजिस्टिक मार्गों के महत्व पर भी जोर दिया।
राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। दोनों देशों की सुविधा के अनुसार शिखर सम्मेलन की तारीख राजनयिक माध्यमों से तय की जाएगी। यह निमंत्रण दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान भी दिया गया था।
मुलाकात के दौरान सांस्कृतिक कूटनीति की भी झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को महान तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर की कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भेंट किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि तिरुक्कुरल भाषाओं और सीमाओं से परे तिरुवल्लुवर की शाश्वत शिक्षाओं और ज्ञान को पहुंचाता है।
इस बीच ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स देशों की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में नए आर्थिक विकास केंद्र उभर रहे हैं और व्यापारिक तथा आर्थिक साझेदारी वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पुतिन ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देश खुद औद्योगिक गिरावट और बजट घाटे जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने ब्रिक्स देशों की बड़ी आबादी और तेजी से बढ़ते घरेलू बाजार को इसकी आर्थिक क्षमता का प्रमुख आधार बताया।
भारत और रूस के बीच यह उच्चस्तरीय संपर्क ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। ऐसे में मोदी-पुतिन वार्ता को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के साथ व्यापार, ऊर्जा, औद्योगिक सहयोग और वैश्विक मंचों पर समन्वय मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




