नई दिल्ली, 28 सितंबर। सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के दो गुटों के बीच चल रहे चुनाव चिह्न विवाद पर चुनाव आयोग (ECI) को फैसला लेने की समयसीमा तय कर दी है। अदालत ने निर्देश दिया कि प्रतिद्वंद्वी गुट द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद चुनाव आयोग तीन महीने के भीतर विवाद पर निर्णय करे।
यह आदेश पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत आगामी उपचुनावों के मद्देनजर विवादित चुनाव चिह्न को अंतिम निर्णय होने तक अंतरिम रूप से फ्रीज किया गया था।
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक चार्ट पेश किया, जिसमें पूर्व में सामने आए पार्टी चुनाव चिह्न संबंधी विवादों के निपटारे में लगे समय का विवरण दिया गया। आयोग ने बताया कि इस तरह के विवाद उसके समक्ष पहले भी आते रहे हैं और मौजूदा मामले में भी प्रक्रिया पूरी करने के लिए निर्धारित समय के भीतर निर्णय लिया जा सकता है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी ध्यान में रखा कि ममता बनर्जी की ओर से जवाब पहले ही दाखिल किया जा चुका है, जबकि दूसरे गुट की ओर से जवाब दाखिल किया जाना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिद्वंद्वी गुट को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतिद्वंद्वी गुट का जवाब मिलने के बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव चिह्न विवाद पर अपना फैसला देना होगा। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की आगे की कार्यवाही के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित कर दी है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने विवाद के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। इसलिए चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर विचार करने के बाद अपने स्तर पर मामले का निर्णय करेगा।




