हिंदू धर्म में जितिया व्रत का बहुत अधिक महत्व है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। जितिया व्रत को हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। महिलाएं इस व्रत को अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।
इस व्रत से जुड़े नियम काफी कठिन होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि नियमों का पालन न करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। जितिया व्रत को करवा चौथ और हरितालिका तीज से भी ज्यादा कठिन माना जाता है। क्या आप जानते हैं कि इस व्रत को इतना कठिन क्यों माना जाता है? आइए, इस आर्टिकल में हम आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं।
क्यों कठिन है जितिया व्रत?
करवा चौथ व्रत की शुरुआत सूर्योदय से होती है और चांद निकलने तक इस व्रत को किया जाता है। हरितालिका तीज का व्रत 24 घंटे का होता है, जबकि जितिया व्रत की अवधि 36 घंटे की होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जितिया व्रत की शुरुआत अष्टमी तिथि से होती है और यह नवमी तिथि के शुभ मुहूर्त तक चलता है। करवा चौथ के दिन महिलाएं रात को चांद को जल देने के बाद व्रत का पारण करती हैं, लेकिन जितिया व्रत का पारण नवमी तिथि और पंचांग के शुभ मुहूर्त पर निर्भर करता है।
निर्जला व्रत
वैसे देखा जाए तो करवा चौथ और तीज व्रत के नियम भी कठिन होते हैं, लेकिन जितिया व्रत के नियम इनसे भी अधिक कठिन होते हैं। इस व्रत के दौरान पानी की एक बूंद पीना भी सख्त मना होता है। इसके अलावा भोजन करने की भी सख्त मनाही होती है। इन्हीं कारणों से जितिया व्रत को करवा चौथ और तीज से अधिक कठिन माना जाता है।




