जगदलपुर, 05 अक्टूबर। लंबे समय तक नक्सल हिंसा और बारूदी सुरंगों की त्रासदी झेलने वाला बस्तर अब शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। इसी दिशा में जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन सहायता एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर ने नक्सल हिंसा और अन्य हादसों में दिव्यांग हुए लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित इस शिविर में बस्तर संभाग के बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर जिलों से 3,800 से अधिक जरूरतमंदों का पंजीयन किया गया है। शिविर में नक्सली विस्फोट, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य कारणों से अंग गंवाने वाले दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्चुअल माध्यम से शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सली हिंसा के दंश से प्रभावित रहा है, लेकिन अब यह अंचल उस दौर से बाहर निकलकर विकास की नई दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह शिविर केवल उपकरण वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री ने नक्सल हिंसा में अपने अंग गंवा चुके लोगों को भरोसा दिलाया कि वे खुद को अकेला न समझें। सरकार और समाज पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बस्तर को नक्सल हिंसा से मुक्त कराना नहीं, बल्कि शांत, सशक्त और विकसित बस्तर का निर्माण करना है।
कार्यक्रम में मौजूद उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। बारूदी सुरंगों और आईईडी विस्फोटों में अपने अंग गंवाने वाले नागरिकों को दोबारा आत्मनिर्भर बनाना भी इस लड़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने धमाकों से लोगों के पैर छीने, लेकिन बस्तर के लोगों का आत्मबल नहीं छीन सके। आज कृत्रिम अंगों की मदद से नक्सल हिंसा के पीड़ित फिर से अपने पैरों पर खड़े होकर स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री ने आईईडी ब्लास्ट में घायल ग्रामीण संतोष पोयाम तथा कर्तव्य के दौरान घायल हुए पुलिस जवान राकेश कुमार यादव और घासीराम मांझी की जीवटता का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम अंगों की सहायता से ये सभी अब बिना किसी सहारे के चलने के लिए तैयार हैं।
यह अभियान जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के समन्वय से भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, एनएसई फाउंडेशन और भारतीय जैन संघटना के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है।
शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां ऑन-साइट आधुनिक कार्यशाला में विशेषज्ञ दिव्यांगजनों का व्यक्तिगत नाप लेकर मौके पर ही आधुनिक कृत्रिम हाथ, पैर और कैलिपर्स तैयार कर उन्हें लगाए जा रहे हैं। शिविर के पहले ही दिन 70 से अधिक हितग्राहियों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए।




