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भाषा के नाम पर भेदभाव से बिगड़ सकता है देश का माहौल: रघु ठाकुर

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रायपुर, 19 अक्टूबर। सुप्रसिद्ध समाजवादी चिंतक एवं जननेता रघु ठाकुर ने कहा है कि भाषा के मुद्दे पर केंद्र सरकार को सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र में हिंदी की पढ़ाई बंद करने और गैर-मराठी ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा का प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे फैसले देश की एकता और अखंडता को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु में अनुदान रोकने की कार्रवाई करती है, लेकिन महाराष्ट्र में इसी तरह के मामले पर मौन है।

         श्री ठाकुर रायपुर प्रेस क्लब में कल आयोजित ‘भाषायी विवाद और भारत का भविष्य’ विषयक परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर कट्टरता और क्षेत्रीयता को बढ़ावा देना देशहित में नहीं है। ऐसे फैसलों से समाज में भय और आशंका का वातावरण बन सकता है, जिसे दूर करना आवश्यक है।

      श्री ठाकुर ने भाषायी अलगाववाद के खतरे को समझाने के लिए बांग्लादेश का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने ढाका में बंगाली भाषा पर उर्दू थोपने का प्रयास किया था। इसके बाद पैदा हुए भाषायी असंतोष ने बांग्लादेश के अलग राष्ट्र के रूप में उभरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आशंका जताई कि वैश्विक कॉरपोरेट ताकतें भी भारत में भाषायी विभाजन को बढ़ावा देने की कोशिश कर सकती हैं।

     उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर लोगों में कट्टरता बढ़ेगी तो देश की एकता कमजोर होगी। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा के साथ हिंदी अथवा किसी अन्य भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा के अध्ययन की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर किए गए फैसलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद केंद्र सरकार का इस मुद्दे पर चुप रहना विरोधाभासी है।

    श्री ठाकुर ने कहा कि महात्मा गांधी, डॉ. राममनोहर लोहिया, लोकमान्य तिलक और काका कालेलकर जैसे नेताओं ने अंग्रेजी के वर्चस्व तथा औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के लिए हिंदी और भारतीय भाषाओं को महत्व दिया था। हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी और राजभाषा तक सीमित रह गई। अब उसे अन्य भारतीय भाषाओं के साथ वैमनस्य की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

     उन्होंने कहा कि इन महान नेताओं की परिकल्पना भारतीय भाषाओं के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध विकसित करने की थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इसके विपरीत दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही हैं। देश की एकता और अखंडता मजबूत करने के लिए प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक अन्य भारतीय भाषा सीखने तथा विभिन्न राज्यों के लोगों के साथ मित्रता और संवाद बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।

    लोहिया और पेरियार के बीच भाषा को लेकर हुए संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पेरियार हिंदी के नहीं, बल्कि किसी भी भाषा का वर्चस्व थोपे जाने के विरोधी थे। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की भाषा सीखने का संकल्प लिया था। यह उदाहरण बताता है कि भाषायी विवाद का समाधान विरोध और वर्चस्व में नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और संवाद में निहित है।

   साहित्यकार रामकुमार तिवारी ने कहा कि छोटी-छोटी अस्मिताओं को व्यापक राष्ट्रीय पहचान में समाहित करने से ही देश मजबूत बनते हैं। भाषा भी अस्मिता से जुड़ा विषय है, लेकिन स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भारतीय भाषाओं के बीच विवाद होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संवाद के माध्यम से ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। भारत की विविधता में निहित एकता को बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

    पत्रकार रवि भोई ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच विवाद को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि रघु ठाकुर ने इस दिशा में जो पहल की है, उसमें सभी को सहभागी बनना चाहिए।पत्रकार प्रफुल्ल ठाकुर ने कहा कि भाषा संप्रेषण का माध्यम है। इसे भय, श्रेष्ठता की भावना और संकीर्ण अस्मिता से मुक्त रखकर सहज रूप से विकसित होने देना चाहिए।

   परिचर्चा में अतिथियों का स्वागत मातामणि तिवारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अशोक पंडा ने दिया। कार्यक्रम के आयोजन में श्याम सुंदर सिंह और जावेद उस्मानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

     गोष्ठी का शुभारंभ महात्मा गांधी और डॉ. राममनोहर लोहिया के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुआ। संचालन वरिष्ठ पत्रकार जयंत सिंह तोमर ने किया। उन्होंने परिचर्चा की पृष्ठभूमि रखते हुए कहा कि महाराष्ट्र से उभरे भाषायी वर्चस्व के विवाद ने देश को एक नई बहस में डाल दिया है।

    कार्यक्रम में रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी और नागरिक शामिल हुए। इस अवसर पर रामसिंह क्षत्रिय, नरसिंह साहू, सोमनाथ साहू, शिव नेताम बंजारे, रामगुलाम ठाकुर, गिरीश पंकज, गिरीश बोरा, वीरेंद्र पांडे और योगेश सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।