नई दिल्ली, 23 अक्टूबर। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास कई स्थानों पर भारतीय जवानों का चीनी सेना के साथ आमना-सामना हुआ है। इनमें से कुछ स्थानों पर स्थिति अब भी बनी हुई है। उन्होंने इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तैनात आईटीबीपी की नई लड़ाकू टीम ‘शौर्य कमांडो’ के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि इन टीमों ने अपनी परिचालन क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया है।
आईटीबीपी महानिदेशक ने 22 अक्टूबर को बल के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ में जवानों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र के आसपास सीमा पर तनाव की खबरें सामने आई हैं।
श्री कपूर के मुताबिक, आईटीबीपी की प्रत्येक बटालियन में कमांडो टीम तैयार की जा चुकी है, जबकि दो अतिरिक्त टीमें गठित करने की प्रक्रिया चल रही है। बल की योजना प्रत्येक बटालियन में एक पूर्ण कमांडो कंपनी तैयार करने की है। इसके अलावा, विशेष कमांडो अभियानों को अंजाम देने के लिए एक अलग बटालियन गठित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
‘शौर्य कमांडो’ टीमों को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और अधिक ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। इनका उद्देश्य सीमा पर तैनात जवानों की युद्धक क्षमता, त्वरित प्रतिक्रिया और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अभियान संचालित करने की क्षमता को मजबूत करना है।
आईटीबीपी महानिदेशक ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन और उन्नत तकनीकों की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि ड्रोन ने युद्ध लड़ने के पारंपरिक तरीकों में व्यापक बदलाव किया है। आधुनिक संघर्षों में निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और हमलों सहित विभिन्न सैन्य अभियानों में ड्रोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
इसी को ध्यान में रखते हुए आईटीबीपी ड्रोन संचालन और ड्रोन पायलटों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दे रही है। बल अपनी जरूरतों के अनुरूप ड्रोन निर्माण की क्षमता विकसित करने के साथ-साथ एंटी-ड्रोन प्रणालियों के विकास और उनके इस्तेमाल की तैयारी भी कर रहा है। इसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन से उत्पन्न संभावित खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना है।
बल की आधुनिकीकरण योजना के तहत ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इसके साथ ही वाहनों, सैन्य उपकरणों और गोला-बारूद को आधुनिक बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में आवाजाही और अभियान क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष वाहनों, स्वचालित जमीनी वाहनों तथा त्वरित प्रतिक्रिया वाहनों को शामिल करने की योजना है। सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमिगत सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना भी इस आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है।
भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर संवाद की प्रक्रिया भी जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सेक्टर में 6 सितंबर 2026 को कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। यह बैठक वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग पॉइंट पर आयोजित की गई थी। इससे पहले सीमा संबंधी इस तरह की वार्ताएं मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख के चुशुल-मोल्डो बैठक स्थल पर होती रही हैं।
सीमा पर उत्पन्न चुनौतियों के बीच आईटीबीपी की कमांडो क्षमता, ड्रोन तकनीक और आधुनिक सैन्य उपकरणों पर बढ़ता जोर भारत की सीमावर्ती सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




