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क्या आप 30 पार कर चुकी हैं? तो ये 5 टेस्ट करवाने में न करें देरी

आज के दौर की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अक्सर परिवार और कामकाज की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन वे अक्सर भूल जाती हैं कि ‘निरोगी काया’ ही सबसे बड़ा सुख है। इसलिए इस नए साल हर महिला को एक रेजोल्यूशन जरूर लेना चाहिए कि वे अपनी सेहत का ख्याल रखेंगी। 

इसके लिए जरूरी है कि हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ-साथ कुछ हेल्थ टेस्ट भी करवाए जाएं, ताकि अगर कोई समस्या हो, तो वक्त रहते सामने आ जाए। बीमारियों को शुरुआती स्टेज में पकड़ने के लिए हेल्थ चेकअप बहुत जरूरी हैं। आइए जानें ऐसे ही 5 हेल्थ टेस्ट, जो हर महिला को जरूर करवाने चाहिए।  

पैप स्मीयर (Pap Smear) और HPV टेस्ट
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली गंभीर बीमारियों में से एक है। राहत की बात यह है कि समय पर जांच से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
क्यों जरूरी है- पैप स्मीयर टेस्ट से सर्विक्स में होने वाले असामान्य बदलावों का पता चलता है।
कब करवाएं- 21 साल की उम्र के बाद हर 3 साल में यह टेस्ट करवाना चाहिए। 30 साल के बाद डॉक्टर की सलाह पर इसके साथ HPV टेस्ट भी जोड़ा जा सकता है।

मैमोग्राफी (Mammography)
ब्रेस्ट कैंसर के मामले आज तेजी से बढ़ रहे हैं। मैमोग्राफी एक तरह का एक्स-रे है जो ब्रेस्ट में होने वाली छोटी से छोटी गांठ या बदलाव का पता लगा सकता है, जो छूने पर महसूस नहीं होते।
क्यों जरूरी है- ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती स्टेज पर पता चलने से इलाज सफल होने की संभावना लगभग 100% तक होती है।
कब करवाएं- 40 साल की उम्र के बाद हर साल या दो साल में एक बार मैमोग्राफी जरूर करवाएं। यदि परिवार में कैंसर का इतिहास है, तो इसे पहले भी शुरू किया जा सकता है।

थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TFT)
महिलाओं में थायराइड की समस्या (हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म) पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा पाई जाती है। इसके कारण वजन बढ़ना, थकान, बालों का झड़ना और पीरियड्स में अनियमितता जैसी समस्याएं होती हैं।
क्यों जरूरी है- यह टेस्ट खून में T3, T4 और TSH के स्तर को मापता है। थायराइड असंतुलन फर्टिलिटी को भी प्रभावित कर सकता है।
कब करवाएं- अगर आपको बिना कारण थकान या वजन में बदलाव महसूस हो, तो तुरंत जांच करवाएं। आमतौर पर 30 की उम्र के बाद साल में एक बार जांच बेहतर है।

बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan)
उम्र बढ़ने के साथ, खासकर मेनोपॉज के बाद, महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, जिसके कारण ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है।
क्यों जरूरी है- यह टेस्ट हड्डियों की मजबूती और कैल्शियम की कमी को मापता है। इससे भविष्य में फ्रैक्चर के जोखिम को कम किया जा सकता है।
कब करवाएं- 50 साल की उम्र के बाद या मेनोपॉज के लक्षण शुरू होने पर यह टेस्ट जरूर करवाएं।

ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल (Diabetes & Cholesterol)
गलत खान-पान और तनाव के कारण महिलाओं में डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
क्यों जरूरी है- लिपिड प्रोफाइल से कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता चलता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद करता है। वहीं, ब्लड शुगर टेस्ट डायबिटीज की पहचान करता है।
कब करवाएं- 30 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार ये दोनों टेस्ट करवाना जरूरी है।