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परिवहन, पर्यटन और संस्कृति की स्थायी संसदीय समिति ने इस मामले में जताया अफसोस, जानें वजह

परिवहन, पर्यटन और संस्कृति की स्थायी संसदीय समिति ने अफसोस जताया कि पर्यटन मंत्रालय भारत की जी20 की अध्यक्षता के मद्देनजर देश में पर्यटकों का आना बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई और इस बड़े अवसर को गंवा दिया। सोमवार को सदन के दोनों पटलों पर पेश की गई इस संसदीय रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यटन मंत्रालय को जी20 के प्रचार के लिए जारी बजट को भी रद कर देना चाहिए।

व्यापक खाका तैयार करने की जरूरत

समिति का मानना है कि जी20 के अवसर पर पयर्टन और विदेशी मुद्रा एक्सचेंज को अधिकाधिक भुनाने के लिए कोई खाका तैयार ही नहीं किया गया था। समिति ने सिफारिश की है कि पर्यटन के क्षेत्र में अधिक एफडीआइ को आकर्षित करने के लिए और व्यापक खाका तैयार करने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक समिति का मानना है कि जी20 जैसे आयोजन के लिए साल भर पहले से ही अलग बजट रखना चाहिए था। इससे भारतीय पर्यटन पर अधिक प्रभाव पड़ता।

242 करोड़ रुपये का बजट नहीं है पर्याप्त

समिति ने यह भी कहा कि एक साल तक चलने वाले जी20 जैसे विशिष्ट आयोजन के लिए 242 करोड़ रुपये का बजट पर्याप्त नहीं है। इसके तहत नियमित रूप से होने वाली सभी गतिविधियों का प्रचार संभव नहीं है। इसलिए पर्यटन मंत्रालय को वित्त मंत्रालय से इस संबंध में और आर्थिक सहायता मांगनी चाहिए। समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि जी20 की बैठकों से मिलने वाले अवसर और ‘विजिट इंडिया’ के प्रमोशनल अभियान को मंत्रालय को गंवाना नहीं चाहिए। और अगले वित्त वर्ष के शुरू होने पर देश-विदेश में प्रचार के लिए व्यापक रोडमैप बनाएं ताकि उस बजट का समुचित उपयोग हो सके।