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जानें केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में क्या कुछ कहा…

केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में कहा कि बिहार में किसी सांस्कृतिक स्थल को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नालंदा के पुरातात्विक स्थल तेल्हारा में खोदाई के दौरान भगवान बुद्ध की मूर्तियां, पाली भाषा में लिखे मुहर सहित शिलालेख मिले हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय विरासत और संरक्षण संस्थान स्थापित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। किशन रेड्डी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान बिहार में केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारकों और स्थलों के संरक्षण और रखरखाव पर खर्च की गई राशि का डेटा भी साझा किया। 2018-19 में, ऐसे स्थलों के संरक्षण और रखरखाव पर 1.76 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई थी, जबकि 2019-20 में यह आंकड़ा 1.45 करोड़ रुपये, 2020-21 में 1.23 करोड़ रुपये और 2021-22 में 3.35 करोड़ रुपये था। 2022-23 में एक मार्च तक 7.21 करोड़ रुपये खर्च किए गए। एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सरकारी भूमि सूचना प्रणाली (जीएलआइएस) पोर्टल के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास उपलब्ध कुल भूमि 161.34 वर्ग किलोमीटर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की एजेंसियों या सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों ने एएसआई की भूमि का अतिक्रमण भी कर रखा है। अतिक्रमण को रोकने और उन्हें हटाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि सरकार संरक्षित स्मारकों और स्थलों के आसपास निर्माण संबंधी गतिविधियों को प्रभावित करने वाले कानूनों को लचीला बनाने पर विचार कर रही है ताकि देश की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए बुनियादी ढांचे की अनुमति दी जा सके। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में जी किशन रेड्डी ने कहा कि छह अक्टूबर, 2021 से 31 मार्च, 2022 तक 1,27,999 नियमित पर्यटक वीजा और 2,27,225 ई-पर्यटक वीजा जारी किए गए। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों से 2014 के बाद से 231 पुरावशेषों को वापस लाया गया है। गेटवे आफ इंडिया के निरीक्षण के दौरान दरारें मिलीं केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि मुंबई में गेटवे आफ इंडिया के निरीक्षण के दौरान सतह पर कुछ दरारें पाई गईं। गेटवे आफ इंडिया पुरातत्व और संग्रहालय विभाग, महाराष्ट्र सरकार के संरक्षण में है। इस संबंध में केंद्र सरकार को कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। गेटवे आफ इंडिया को दिसंबर 1911 में ब्रिटिश सम्राट ¨कग जार्ज पंचम के आगमन की याद में बनाया गया था। इसका निर्माण 1924 में पूरा हुआ था।