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भगवान श्रीराम के आदर्श गुणों को आत्मसात करना ही हैं मन की अयोध्या को सजाना –चक्रधर

रायपुर, 01अप्रैल।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों एवं गुणों को मन में आत्मसात करना ही “मन की अयोध्या” को सजाना है।

   श्री चक्रधर ने आज राष्ट्रीय विचार पत्रिका “स्वदेश” द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम “विमर्श” में “समय है अब मन की अयोध्या को सजाने का” विषय पर आयोजित विमर्श व्याख्यान में कहा कि केवल मन ही नहीं, बल्कि अपने परिवार, समाज, गांव और राष्ट्र को भी राममय बनाना है। उन्होंने श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन वचन-पालन, धैर्य, करुणा भाव, परामर्श, श्रेय, न्याय, अहंकार का त्याग, मित्रता और दूसरों के प्रति सम्मान एवं समभाव जैसे गुणों से परिपूर्ण था। इन गुणों को अपनाकर हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।

   श्री चक्रधर ने आगे श्रीराम के जीवन से जुड़ी घटनाओं के छोटे-छोटे उदाहरणों के माध्यम से उनके आदर्श गुणों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि श्रीराम वचन के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञ थे—राजतिलक की घोषणा के अगले ही दिन उन्होंने पिता दशरथ द्वारा दिए गए वचन के सम्मान में सहर्ष वनवास स्वीकार किया। इसी प्रकार उन्होंने हर सुख-दुख की परिस्थिति में धैर्य बनाए रखा, कभी भी अहंकार को अपने पास नहीं आने दिया और सभी के साथ समभाव रखते हुए सम्मान का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इन गुणों को आत्मसात कर हम अपने मन, परिवार, समाज और राष्ट्र को सशक्त बना सकते हैं और 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं।

     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेश पत्र समूह ने अपनी सात दशकों की अविरल यात्रा में समाज में भारतीयता की भावना को पुष्ट करने का कार्य किया है।उन्होने कहा कि वर्ष 1975 में जब देश में आपातकाल लागू हुआ, तब स्वदेश समाचार पत्र समूह के अधिकांश लोगों को जेल में डाल दिया गया। इसके बावजूद यह पत्र भारतीयता की भावना को लोगों तक पहुँचाता रहा और अडिग रहा। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की हत्या की गई और लाखों लोगों को जेल में डाल दिया गया। अनेक परिवार उजड़ गए। ऐसे मीसाबंदियों को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार ने सम्मान निधि देना प्रारंभ किया था, जो पिछले 5 वर्षों से बंद थी, जिसे हमारी सरकार ने पुनः प्रारंभ किया है। साथ ही विधानसभा में विधेयक लाकर यह सुनिश्चित किया गया है कि मीसाबंदियों को यह सम्मान राशि निरंतर मिलती रहे।

   इस अवसर पर अयोध्या आंदोलन पर केंद्रित ग्रंथ “राम काजु कीन्हें बिनु” एवं छत्तीसगढ़ की लोक कला-संस्कृति पर आधारित पुस्तक का विमोचन मंच से किया गया।

  कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य क्षेत्र के संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने की। कार्यक्रम को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं मध्य क्षेत्र के संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना समूह संपादक श्री अतुल तारे ने रखी। आभार प्रदर्शन योगेश मिश्रा (स्थानीय संपादक) ने किया तथा संचालन शशांक शर्मा ने किया।