
रायपुर, 23 जनवरी।छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को दुर्भावनापूर्ण तरीके से प्रभावित कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है।
श्री बैज ने आज यहां जारी बयान में कहा कि बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सल हिंसा और सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाइयों के कारण दशकों से विस्थापित आदिवासियों को बिना पूर्व सूचना दिए “नॉन रेजिडेंट” बताकर मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। यह न केवल अन्याय है, बल्कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन भी है।
उन्होंने बताया कि बस्तर के लाखों आदिवासी वर्तमान में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में रह रहे हैं, लेकिन निर्वाचन आयोग इन विस्थापित मतदाताओं की वास्तविक पहचान करने में रुचि नहीं दिखा रहा। बिना नोटिस सीधे नाम हटाकर उन्हें मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। बैज ने आरोप लगाया कि संसाधनों की लूट और जंगलों की अंधाधुंध कटाई के विरोध में आदिवासी सरकार के खिलाफ हैं, इसी कारण सुनियोजित तरीके से बड़ी संख्या में आदिवासी मतदाताओं को वोट के अधिकार से बाहर किया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान राज्यभर में लाखों मामलों में सत्यापन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। निर्वाचन आयोग के अपने आंकड़े बताते हैं कि लगभग 70 प्रतिशत नोटिसों का जवाब अभी तक नहीं आया है, और जिन मामलों में जवाब प्राप्त हुए हैं, उनमें भी सुनवाई और अंतिम निर्णय लंबित है। ऐसे हालात में दावा-आपत्ति की समय-सीमा तत्काल बढ़ाई जानी चाहिए।
दीपक बैज ने आगे कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में करीब 19 लाख 13 हजार मतदाताओं को विस्थापित दिखाया गया है, जिसका अर्थ यह है कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) इन मतदाताओं तक पहुंचे ही नहीं। मतदाता बीएलओ को खोजते रह गए और अब उनके सामने मतदान अधिकार छिन जाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
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