
(संतोष यादव)
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में सपा के पूर्व विधायक अनूप संडा की अगुवाई में निकली ’पीडीए सम्मान जनजागरण पद यात्रा’ ने ठंड के इस मौसम में सुल्तानपुर का सियासी तापमान बढ़ा दिया है। सुल्तानपुर विधानसभा के कई गांवों, कस्बों से होकर गुजरी इस पद यात्रा में पूर्व मंत्री लीलावती कुशवाहा, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी पहुंचकर यात्रा में शामिल लोगों का उत्साह बढ़ाया।
डॉ राम मनोहर लोहिया की पुण्य तिथि पर शुरू हुई पद यात्रा चार सौ से अधिक बूथों पर ले जाने का लक्ष्य है। पहले चरण की यात्रा 150 बूथों एवं दूसरे चरण की यात्रा 125 बूथों तक पहुंची जिसमें जगह, जगह हजारों कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। इस दौरान लोगों से मुलाकात कर नुक्कड़ सभाओं में पूर्व विधायक अनूप संडा ने युवाओं के रोजगार, किसानों की समस्याओं और शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा की।
पीडीए सम्मान जनजागरण पद यात्रा का दूसरा चरण पूरा होना, महज़ एक यात्रा का पड़ाव नहीं बल्कि आने वाली राजनीतिक हलचल का वार्मअप माना जा रहा है। गांव-गांव, गली-गली जनता से संवाद कर अनूप संडा ने यह संकेत दे दिया है कि पीडीए को लेकर जमीन पर माहौल तैयार किया जा चुका है। उनकी यात्रा का दूसरा चरण संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और सामाजिक समीकरणों को साधने का सियासी वार्मअप साबित हुआ। पद यात्रा के दौरान उठाए गए मुद्दे, सामाजिक न्याय, भागीदारी और हक़ की बात आने वाले बड़े राजनीतिक कदमों की भूमिका बांधते दिखे।
यह पद यात्रा भविष्य की रणनीति से पहले किया गया राजनीतिक वार्मअप है, जिसमें जनता की नब्ज़ टटोली गई और संदेश साफ़ दिया गया कि अब अगला चरण और ज़्यादा आक्रामक और निर्णायक होगा। राजनीति में पदयात्रा का बड़ा महत्व है। यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि जनता से सीधा जुड़ाव का माध्यम है। जिसे श्री संडा बखूबी समझते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनूप संडा की यह पदयात्रा क्षेत्र में राजनीतिक सक्रियता को नई दिशा दे रही है और आगामी चुनावों में यह जनता के रुख को प्रभावित कर सकती है।
गौरतलब है कि, जिले में सक्रियता के दृष्टि से सपा संगठन की मौजूदा स्थिति अच्छी नहीं है। बावजूद इसके पद यात्रा से माहौल में हलचल तो आई है। लंबे समय से निष्क्रिय पड़े कार्यकर्ताओं को एक मुद्दा, एक चेहरा और एक बहाना मिला है बाहर निकलने का। हालांकि, यह असर स्थायी तभी होगा जब संगठन इसे आगे बढ़ाए, वरना यात्रा केवल वार्मअप तक सिमटकर रह जाएगी। बिना मजबूत बूथ, सक्रिय इकाइयों और फॉलो-अप के यह संपर्क चुनावी पूंजी में बदल पाना मुश्किल है। अगर एक व्यक्ति की सक्रियता पर पूरी कवायद टिकी हो, तो सवाल संगठन की सामूहिक ताकत पर उठता है।ऐसे में पद यात्रा नेतृत्व के लिए अलार्म बेल भी है। कुल मिलाकर, पद यात्रा से सपा को संजीवनी नहीं, लेकिन सिग्नल जरूर मिला है। यह शुरुआत का वार्मअप है, असली असर तभी दिखेगा जब इसे संगठनात्मक मजबूती, निरंतर आंदोलन और ज़मीनी तैयारी से जोड़ा जाएगा।
पूर्व विधायक अनूप संडा ने अपनी यात्रा का मकसद एसआईआर को लेकर लोगों को सचेत करना, नए मतदाताओं को जुड़ने के लिए जागरूक करने के साथ पीडीए के साथ सरकार द्वारा किए जा रहे भेदभाव पर चर्चा एवं सबको 2027 के लिए संगठित रखना ध्येय बताया ताकि सूबे में समाजवादी सरकार बन सके। यात्रा को लेकर सबका अपना नजरिया है। पूरी यात्रा में साथ रहकर व्यवस्था देख रहे जिला पंचायत सदस्य ज्ञान प्रकाश यादव कहते हैं कि यह यात्रा जनता की आवाज़ को मंच तक पहुँचाने का प्रयास है। वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि, पूर्व विधायक की पदयात्रा ने क्षेत्र में राजनीतिक माहौल को नई गति दे दी है।
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