देश में कैंसर एक बड़े और गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ रहा है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि वर्ष 2045 तक देश में हर वर्ष कैंसर के नए मरीजों की संख्या 15 लाख से बढ़कर 24.5 लाख से अधिक हो जाएगी।
ऐसे में इसकी रोकथाम के लिए केवल उपचार पर केंद्रित नीति पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि समय पर जांच, रोकथाम और शुरुआती पहचान को राष्ट्रीय स्वास्थ्य रणनीति का केंद्र बनाना होगा। इंडियन कैंसर सोसायटी (आइसीएस) दिल्ली ने विश्व कैंसर दिवस की पूर्व संध्या पर कहा कि नीति यह होनी चाहिए कि मरीज उस स्थिति तक पहुंचें ही नहीं, जहां महंगा उपचार ही एकमात्र विकल्प बचे ।
केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने कैंसर उपचार को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए कई घोषणा की थी। इनमें चुनिंदा कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में छूट व घरेलू बायोफार्मा उत्पादन को बढ़ावा देना शामिल है। आइसीएस के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन कदमों का स्वागत तो किया पर, साथ ही चेताया भी कि उपचार तक सीमित सोच व नीति भारत में बढ़ते कैंसर बोझ से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।
मंगलवार को इन मुद्दों पर आयोजित संवाद में आइसीएस दिल्ली शाखा के स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और कैंसर से उबर चुके लोगों ने कैंसर के बदलते रुझानों, जांच व्यवस्था कमजोरियों और प्रभावी रोकथाम रणनीतियों की जरूरत पर विस्तार से चर्चा की। कहा गया कि बजट ने इलाज को कुछ हद तक सुलभ बनाया है, लेकिन हमारा फोकस इस बात पर है कि सामुदायिक स्तर पर काम करते हुए नीति और धरातली हकीकत के बीच की खाई को पाटा जाए।
आइसीएस दिल्ली की चेयरपर्सन ज्योत्सना गोविल ने कहा कि मिथकों को तोड़ना, समय पर जांच को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक जानकारी को आम लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। फोर्टिस मेमोरियल हास्पिटल के सीनियर डायरेक्टर ( आंकोलाजी ) डॉ. नितेश रोहतगी ने शुरुआती स्क्रीनिंग और नई डायग्नोस्टिक तकनीकों को बेहतर इलाज परिणाम और कम लागत की कुंजी बताया। नीति आयोग की पूर्व निदेशक और कैंसर सर्वाइवर डॉ. उर्वशी प्रसाद ने कैंसर डाटा की खामियों, क्षेत्रीय असमानताओं और वित्तीय बाधाओं की ओर ध्यान दिलाया।
स्वास्थ्य संकट
इंडियन कैंसर सोसायटी की चेतावनी, सिर्फ इलाज नहीं, समय पर जांच और रोकथाम ही बचा सकती है जिंदगियां यदि कैंसर के बढ़ते खतरे को रोकना है, तो रोकथाम और शुरुआती पहचान को स्वास्थ्य व्यवस्था को उपचार की प्राथमिकता बनाना ही होगा
विशेषज्ञों का सुझाव, कैंसर पर प्रभावी रोकथामको नीति यह होनी चाहिए कि मरीज उस स्थिति तक पहुंचें नहीं, जहां महंगा उपचार ही एकमात्र विकल्प बचे
कहां है कमी
प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर स्क्रीनिंग की कमजोर व्यवस्था
कैंसर से जुड़े विश्वसनीय और एकीकृत डाटा की कमी
इलाज और जांच में क्षेत्रीय असमानताएं
गरीब और वंचित वर्ग तक डायग्नोस्टिक सुविधाओं की सीमित पहुंच
देर से पहचान के कारण इलाज की लागत और मृत्यु दर में वृद्धि
CG News | Chhattisgarh News Hindi News Updates from Chattisgarh for India