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देश की गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 272 गीगावाट के पार

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को कहा कि भारत की गैर-जीवाश्म आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता 272 गीगावाट से अधिक हो गई है। इसमें 141 गीगावाट सौर तथा 55 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है।

उन्होंने भारत-ब्रिटेन ऑफशोर विंड टास्कफोर्स (अपटतीय पवन ऊर्जा कार्यबल) की शुरुआत के मौके पर यह जानकारी दी। इस अवसर पर ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी और भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरून भी मौजूद थीं।

कार्यबल की औपचारिक शुरुआत के मौके पर जोशी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 35 गीगावाट से अधिक सौर तथा 4.61 गीगावाट पवन क्षमता जोड़ी है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भारत ने अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्त्रोतों से हासिल किया। यह उपलब्धि निर्धारित लक्ष्य से पांच वर्ष पहले हासिल की गई। मंत्री ने कहा, ‘आज भारत की स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता 272 गीगावाट से अधिक है, जिसमें सौर से 141 गीगावाट और पवन से 55 गीगावाट है।

हमारी व्यापकता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत दो साल से कम समय में करीब 30 लाख परिवारों को ‘रूफटॉप सोलर’ की सुविधा मिली। इसके अलावा प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजना के तहत 21 लाख पंपों का सौरकरण किया गया है।’

उन्होंने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट नीति, संस्थागत समन्वय तथा निवेशकों और उद्योग के भरोसे को दर्शाते हैं। मंत्री ने कहा कि हालांकि अगले चरण में विश्वसनीयता, ग्रिड स्थिरता, औद्योगिक गहराई तथा ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करना होगा।