बीपी-शुगर की हर गोली जरूरी नहीं! डॉक्टर ने बताया कब दवाओं का फायदा कम और नुकसान ज्यादा होने लगता है

हम सभी अपने बुजुर्गों की सेहत को लेकर बहुत फिक्रमंद रहते हैं। हमारी कोशिश रहती है कि उन्हें हर मुमकिन इलाज मिले। इसी प्यार और फिक्र के चलते, अक्सर हमारे घरों में बुजुर्गों की सुबह ब्लड प्रेशर, शुगर और दिल की बीमारियों की ढेर सारी गोलियां खाने से शुरू होती है। हमें लगता है कि जितनी ज्यादा दवाइयां चलेंगी, वे उतने ही सुरक्षित रहेंगे।
लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि उम्र के इस नाजुक दौर में शरीर को सच में इतने सारे केमिकल्स की जरूरत है? ‘बीएमसी जेरियाट्रिक्स’ जर्नल में छपी एक नई ग्लोबल रिसर्च ने इस धारणा को पूरी तरह पलट दिया है। आइए, शारदा हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से समझते हैं इस बारे में।
भविष्य की चिंता या आज की परेशानी?
डॉक्टर अक्सर ऐसी दवाइयां लिखते हैं जो आने वाले कई सालों में होने वाली बीमारियों से हमें बचाती हैं। लेकिन रिसर्च बताती है कि जो बुजुर्ग शरीर से बहुत कमजोर हो चुके हैं, या जिन्हें भूलने की बीमारी है, उनके लिए ये ‘बचाव वाली दवाइयां’ अक्सर बेमानी हो जाती हैं।
कारण बहुत सीधा है- इन दवाओं का फायदा सालों बाद मिलता है, लेकिन इनका भारीपन शरीर को आज ही झेलना पड़ता है। एक साथ कई तरह की दवाइयां खाना शरीर को अंदर से और थका देता है।
दवाइयों के बोझ से होने वाले नुकसान
ज्यादा दवाइयों के इस कॉकटेल से बुजुर्गों में कई गंभीर समस्याएं पैदा होने लगती हैं, जैसे:
हर वक्त चक्कर आना या कमजोरी महसूस होना।
दिमाग का सुन्न पड़ना या चीजों को लेकर भ्रम में रहना।
अचानक संतुलन बिगड़ना और गिर जाना (जो अक्सर उन्हें सीधा अस्पताल पहुंचा देता है)।
भारत में यह समस्या क्यों बढ़ रही है?
हमारे यहां अक्सर बुजुर्ग अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग डॉक्टरों के पास जाते हैं। कोई दिल का डॉक्टर है तो कोई शुगर का। ऐसे में, पर्चे तो बढ़ते जाते हैं, लेकिन कोई एक डॉक्टर बैठकर यह नहीं देखता कि कहीं इन सभी पर्चों की दवाइयां आपस में टकरा कर मरीज को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहीं।
किन दवाइयों की समीक्षा है जरूरी?
रिसर्च के अनुसार, बहुत कमजोर मरीजों में अगर दवाइयों का नुकसान उनके फायदे से ज्यादा हो रहा है, तो डॉक्टर की मदद से उन्हें कम करने पर विचार करना चाहिए। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
बीपी और शुगर की दवाइयां: ब्लड प्रेशर को बहुत ज्यादा कम करने से मरीज गिर सकते हैं। वहीं, इंसुलिन जैसी दवाइयां शुगर को अचानक बहुत नीचे गिरा सकती हैं।
बचाव की दवाइयां: कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली या एस्पिरिन जैसी गोलियां, जिनकी शायद अब शरीर को जरूरत न हो।
रोजमर्रा की गोलियां: लंबे समय से चल रही गैस की दवाइयां, नींद की गोलियां या शरीर से पानी निकालने वाली दवाइयां जो इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगाड़ती हैं।
दवाइयां कम करने का असर
जब डॉक्टरों की देखरेख में गैर-जरूरी दवाओं को हटाया जाता है, तो इसके नतीजे हैरान करने वाले होते हैं। बुजुर्गों के अंदर अचानक एक नई ऊर्जा आ जाती है, उनका दिमाग पहले से ज्यादा साफ काम करने लगता है और उनके गिरने का खतरा काफी कम हो जाता है। अब मेडिकल साइंस भी यही मान रहा है कि उम्र के इस पड़ाव पर आक्रामक इलाज की नहीं, बल्कि ऐसी देखभाल की जरूरत है जो मरीज को आज सुकून दे सके।
इस बात का जरूर रखें ध्यान
कभी भी जोश में आकर या खुद से अपने घर के बुजुर्गों की कोई दवा बंद न करें। यह जानलेवा हो सकता है, खासकर उन मरीजों के लिए जिन्हें पहले हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ चुका है। दवाइयां कम करने की यह पूरी प्रक्रिया हमेशा डॉक्टर की देखरेख में धीरे-धीरे ही की जानी चाहिए।




