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“बस्तर में ढहा लाल आतंक का गढ़:लोकसभा में अमित शाह का विस्तृत बयान”

नई दिल्ली, 30 मार्च।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर विस्तृत और आक्रामक संबोधन देते हुए दावा किया कि देश विशेषकर बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद अब “लगभग-लगभग समाप्त” हो चुका है और 31 मार्च 26 तक भारत पूरी तरह नक्सल मुक्त हो जाएगा।

  गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में, जहां कभी नक्सलियों का प्रभाव था, अब व्यापक स्तर पर विकास कार्य हुए हैं। उन्होंने बताया कि हर गांव में स्कूल, राशन की दुकानें, स्वास्थ्य केंद्र (PHC-CHC), आधार कार्ड और बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। शाह ने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1970 से लेकर 2014 तक इन क्षेत्रों में यह बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पाईं।

   श्री शाह ने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने “होल ऑफ गवर्नमेंट” और “होल ऑफ एजेंसी” अप्रोच अपनाई, जिसमें विकास और सुरक्षा को साथ-साथ आगे बढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि 17,589 किलोमीटर सड़कों की मंजूरी दी गई, जिनमें से लगभग 12,000 किलोमीटर बन चुकी हैं। इसके अलावा 5,000 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए और हजारों बैंक शाखाएं, एटीएम तथा डाकघर खोले गए।

   शिक्षा और कौशल विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि 259 एकलव्य आदर्श विद्यालय, 46 आईटीआई, 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के तहत जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी बनाया गया।

    गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद का मूल कारण गरीबी या विकास की कमी नहीं, बल्कि एक “हिंसक विचारधारा” है। उन्होंने कहा कि “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है” जैसी सोच लोकतंत्र के खिलाफ है।उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि नक्सलवाद की शुरुआत 1970 के दशक में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र से हुई और धीरे-धीरे 12 राज्यों में फैलकर “रेड कॉरिडोर” बन गया, जहां कानून व्यवस्था लगभग समाप्त हो गई थी और करीब 12 करोड़ लोग प्रभावित हुए।

    श्री शाह ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में से 60 वर्षों तक शासन करने वाली कांग्रेस ने आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान नक्सलवाद को “प्रच्छन्न समर्थन” मिला, जिससे यह आंदोलन फैलता गया।उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी और मनमोहन सिंह के वक्तव्यों का हवाला देते हुए कहा कि नक्सलवाद को गंभीर चुनौती माना गया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

  गृह मंत्री ने बताया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), CRPF, कोबरा कमांडो, राज्य पुलिस और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के DRG जवानों ने इस लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में 406 नए कैंप, 596 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन और 68 हेलीपैड बनाए गए।

 उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2024 से 2026 के बीच 706 नक्सली मारे गए, 2,218 गिरफ्तार हुए और 4,839 ने आत्मसमर्पण किया। उन्होंने दावा किया कि नक्सल संगठन की केंद्रीय कमेटी और पोलित ब्यूरो पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

   श्री शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति दो टूक है—जो हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास की पूरी व्यवस्था है, लेकिन जो हथियार उठाएंगे, उन्हें “उसी भाषा में जवाब” दिया जाएगा।सरकार ने आत्मसमर्पण करने वालों के लिए आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण, आवास और मासिक भत्ता जैसी योजनाएं लागू की हैं।

    गृह मंत्री ने माओवादियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने हजारों निर्दोष लोगों की हत्या की, बच्चों को जबरन भर्ती किया और “जनता अदालत” के नाम पर समानांतर न्याय व्यवस्था चलाई।उन्होंने कहा कि 20,000 से अधिक लोग इस हिंसा में मारे गए और हजारों लोग दिव्यांग हो गए। उन्होंने “अर्बन नक्सल” कहे जाने वाले बुद्धिजीवियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल माओवादियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हैं, लेकिन पीड़ितों के लिए आवाज नहीं उठाते।

     श्री शाह ने रूस और चीन की साम्यवादी क्रांतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में ऐसी परिस्थितियां कभी नहीं थीं, फिर भी माओवादी आंदोलन को बाहरी विचारधाराओं से प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में परिवर्तन का रास्ता चुनाव और संवाद है, न कि हिंसा।

   गृह मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि देश अब नक्सलवाद के अंतिम चरण में है और जल्द ही यह पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सुरक्षा बलों, राज्य सरकारों और स्थानीय आदिवासी समुदायों को दिया।उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल नक्सलवाद से मुक्त होगा, बल्कि समावेशी विकास के नए दौर में प्रवेश करेगा।

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