रायपुर, 27 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर ने भारतीय जनता पार्टी पर महिला आरक्षण को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने के बाद भाजपा विपक्षी दलों पर गलत आरोप लगा रही है, जबकि महिला आरक्षण से संबंधित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” वर्ष 2023 में ही पारित हो चुका है। इस कानून के तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
अकबर ने कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन को लेकर भाजपा की मंशा सफल नहीं हो पाई, इसलिए अब वह विपक्ष को घेरने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही कानून बन चुका है, ऐसे में इसे लेकर भ्रम फैलाना उचित नहीं है।
विधानसभा सत्र को लेकर उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत सत्र बुलाने का अधिकार राज्यपाल के पास होता है, लेकिन व्यवहार में यह निर्णय मंत्रिपरिषद की सलाह पर लिया जाता है। सरकार चाहे तो किसी भी महत्वपूर्ण या तात्कालिक मुद्दे पर विशेष सत्र बुला सकती है।
अकबर ने यह भी कहा कि आमतौर पर विशेष सत्र महत्वपूर्ण विषयों, बजट, विश्वास मत या आपात परिस्थितियों में बुलाया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार निंदा प्रस्ताव के लिए विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। उन्होंने इसे असामान्य कदम बताया।
उन्होंने आगे कहा कि निंदा प्रस्ताव सामान्यतः विपक्ष द्वारा नियमित सत्र में लाया जाता है और इसका प्रभाव प्रतीकात्मक होता है, इसका कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती। ऐसे प्रस्ताव केवल राजनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से लाए जाते हैं। अब यह देखना होगा कि भाजपा इस कदम से किसे संदेश देना चाहती है और उसका क्या असर होता है।




