बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई शिखर वार्ता में ताइवान का मुद्दा एक बड़े तनावपूर्ण विषय के रूप में सामने आया। चीन ने साफ चेतावनी दी कि अगर “ताइवान प्रश्न” को सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो अमेरिका और चीन के बीच “टकराव और यहां तक कि संघर्ष” की स्थिति पैदा हो सकती है।
हालांकि बैठक के बाद डोनल्ड ट्रंप ने ताइवान पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी करने से बचते हुए बातचीत को सामान्य मुद्दों तक सीमित रखा। जब पत्रकारों ने ट्रंप से बार-बार पूछा कि क्या ताइवान का मुद्दा बातचीत में उठा, तो उन्होंने सवाल टालते हुए कहा, ‘सब बहुत अच्छा रहा। शानदार जगह है। चीन बेहद खूबसूरत है।’
चीन ने ताइवान को बताया सबसे संवेदनशील मुद्दा
बैठक के बाद चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि शी चिनफिंग ने ट्रंप से साफ शब्दों में कहा कि ‘ताइवान प्रश्न’ अमेरिका-चीन संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
शी चिनफिंग ने कहा, ‘ताइवान की स्वतंत्रता’ और जलडमरूमध्य में शांति आग और पानी की तरह एक-दूसरे के विपरीत हैं।’ उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे को “उचित तरीके से नहीं संभाला गया”, तो दोनों देशों के बीच “टकराव और यहां तक कि संघर्ष” हो सकता है, जिससे द्विपक्षीय संबंध गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे।
मार्को रुबियो बोले-अमेरिका की नीति नहीं बदली
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी चीन की चेतावनी पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
NBC News से बातचीत में रुबियो ने कहा, ‘ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका की नीति आज भी वही है जो पहले थी। चीन हर बार यह मुद्दा उठाता है, हम अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं और फिर दूसरे विषयों पर आगे बढ़ जाते हैं।’ हालांकि उन्होंने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बीजिंग ने ताइवान पर बल प्रयोग करने की कोशिश की, तो यह बहुत बड़ी गलती होगी।
अमेरिका-चीन रिश्तों में फिर बढ़ा तनाव
ताइवान लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील विवादों में शामिल रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग से उसे अपने नियंत्रण में लेने की बात कह चुका है। वहीं अमेरिका आधिकारिक तौर पर “वन चाइना पॉलिसी” मानता है, लेकिन ताइवान को रक्षा समर्थन भी देता रहा है।




