होम उत्तर प्रदेश जेल आंदोलन से बार एसोसिएशन तक: संघर्ष और सक्रियता की मिसाल ’देवतादीन...

जेल आंदोलन से बार एसोसिएशन तक: संघर्ष और सक्रियता की मिसाल ’देवतादीन निषाद’

0

(संतोष कुमार यादव)

सुलतानपुर 20 मई।राजनीति में अक्सर जीत ही पहचान बनाती है, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे भी होते हैं जो बिना चुनाव जीते ही अपने संघर्ष, निरंतरता और सामाजिक जुड़ाव से अलग पहचान कायम कर लेते हैं। वीर एकलव्य समाज सेवा संस्थान के प्रदेश महासचिव एवं समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग के जिलाध्यक्ष देवतादीन निषाद एडवोकेट उन्हीं नामों में शुमार हैं।

       उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी देवतादीन निषाद का राजनीति से जुड़ाव किसी विरासत का हिस्सा नहीं रहा। छात्र जीवन में सामाजिक गतिविधियों में रुचि ने उन्हें सार्वजनिक जीवन की ओर प्रेरित किया। तीस साल पहले वर्ष 1995 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सभासद का चुनाव लड़कर उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की। हार मिली, लेकिन यहीं से सियासत के प्रति लगाव गहराता गया। समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने 1997 में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। पार्टी के कार्यक्रमों, आंदोलनों और अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। ‘जेल भरो आंदोलन’ के दौरान 1997 और 2011 में दो बार जेल जाना उनके संघर्षशील स्वभाव को दर्शाता है।

      आंदोलनकारी तेवर भी उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रहे, पार्टी के ‘जेल भरो आंदोलन’ में भाग लेते हुए 1997 और 2011 में दो बार जेल भी गए। संगठन में उनकी सक्रियता के चलते वर्ष 2000 में उन्हें सपा में नगर महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई, जो उनके संगठनात्मक कौशल का पहला बड़ा पड़ाव था। इसके बाद उन्होंने अपने सीताकुंड वार्ड से 2000, 2005 और 2010 में सभासद पद के लिए चुनाव लड़ा। हालांकि भाजपा प्रभाव वाले क्षेत्र में उन्हें जीत नहीं मिल सकी। इसके बावजूद उन्होंने संगठन में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत किया। पार्टी संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। अधिवक्ता सभा के जिला महासचिव, मेंन कमेटी में जिला कार्यकारिणी सदस्य, सचिव और बाद में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य तक का दायित्व संभाला।

       वर्ष 2021 में समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजपाल कश्यप द्वारा देवतादीन को समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जो उनके संगठनात्मक कौशल का प्रमाण है। वकालत के क्षेत्र में भी देवतादीन निषाद ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इस पेशे में भी उनका सफर उतना ही सशक्त रहा है। बीकॉम और एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2001 से उन्होंने अधिवक्ता के रूप में कार्य शुरू किया। बार एसोसिएशन में कई महत्वपूर्ण पदों पर चुने जाते रहे हैं।2004 में कार्यकारिणी सदस्य, 2007 में कनिष्ठ उपाध्यक्ष, 2012 में सहसचिव (प्रशासन) और 2022 में वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य के रूप में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है।

        देवतादीन निषाद की कहानी इस बात का उदाहरण है कि राजनीति में सफलता केवल पद या जीत से नहीं, बल्कि निरंतरता, संघर्ष और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से भी हासिल की जा सकती है। जिले की सियासत में उनका नाम एक ऐसे कार्यकर्ता के रूप में लिया जाता है, जिसने बिना थके, बिना रुके, अपनी राह खुद बनाई। देवतादीन निषाद का यह सफर बताता है कि राजनीति सिर्फ चुनाव जीतने का नाम नहीं, बल्कि निरंतर सामाजिक जुड़ाव, संघर्ष और संगठन के प्रति समर्पण ही असली पहचान बनाते हैं।