रायपुर 20 मई।छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर बस्तर में नक्सलवाद खत्म करने के मुद्दे पर तथ्य छिपाने और कांग्रेस सरकार के योगदान को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
दोनों नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में कहा कि बस्तर में नक्सल उन्मूलन की मजबूत नींव कांग्रेस सरकार ने 2018 से 2023 के बीच रखी थी, जिसके कारण वर्तमान भाजपा सरकार अभियान को आगे बढ़ाने में सफल हुई।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त होने की घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन इसके साथ कांग्रेस सरकार के कार्यों को नकारना “झूठ का पुलिंदा” पेश करने जैसा है। उन्होंने कहा कि अमित शाह स्वयं कई बार बस्तर दौरे पर गए, कैंपों का निरीक्षण किया और वहां बिजली, राशन दुकान, खेल मैदान जैसी व्यवस्थाओं को देखकर संतोष जताया था।
श्री बघेल ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सुरक्षा बलों के नए कैंप, सड़क निर्माण और ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने का काम शांतिपूर्वक शुरू किया गया था, जिससे बस्तर की तस्वीर बदलने लगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी उस समय राज्य सरकार के कार्यों की सराहना करती रही थी।
कांग्रेस नेताओं ने अमित शाह के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2022 में स्वयं गृह मंत्री ने स्वीकार किया था कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से नक्सली घटनाओं में भारी कमी आई। उन्होंने यह भी कहा था कि 2009 की तुलना में 2021 तक नक्सली हिंसा और उससे होने वाली मौतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अमित शाह को अधूरी और भ्रामक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में ही कोंडागांव जिला और बस्तर के 600 गांव नक्सल मुक्त घोषित हो चुके थे। साथ ही, कांग्रेस सरकार ने बंद पड़े 275 स्कूल दोबारा शुरू किए थे, जबकि भाजपा सरकार अब प्रदेशभर में 10 हजार से अधिक स्कूल बंद करने जा रही है, जिनमें बड़ी संख्या बस्तर संभाग की है।
उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में पहले से ही बड़ी संख्या में राशन दुकानें संचालित हो रही थीं और आदिवासियों को अंत्योदय योजना के तहत प्रति परिवार 35 किलो चावल दिया जा रहा था। ऐसे में अमित शाह द्वारा सात किलो चावल उपलब्ध कराने की बात वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने पांच वर्षों में लाखों व्यक्तिगत और सामुदायिक वनाधिकार पट्टे वितरित किए तथा आदिवासी हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासनकाल में फर्जी एनकाउंटर, गांवों का खाली कराया जाना और आदिवासियों पर अत्याचार जैसी घटनाएं हुईं, जिनका उल्लेख अमित शाह ने नहीं किया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने अमित शाह द्वारा बस्तर में डेयरी नेटवर्क और हर आदिवासी परिवार को गाय-भैंस देने की योजना की घोषणा पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि गुजरात के आनंद मॉडल की सफलता कांग्रेस शासनकाल की देन है, जहां डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में सहकारिता आंदोलन खड़ा हुआ।
महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की सरकार ने भी दुधारू गाय वितरण योजना शुरू की थी, लेकिन उसमें भारी अनियमितताएं सामने आईं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि भाजपा फिर से ऐसी योजना लागू करना चाहती है तो रमन सिंह को उसकी सलाहकार समिति का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए ताकि पुराने अनुभवों से सीख ली जा सके।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बस्तर से नक्सलवाद खत्म होना सभी के लिए खुशी की बात है और इसका स्वागत होना चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार को पूरा श्रेय लेने के बजाय पूर्ववर्ती सरकारों के योगदान को भी स्वीकार करना चाहिए।




