रायपुर 28 मई।भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ की छत्तीसगढ़ इकाई ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को महत्वपूर्ण सुझाव भेजते हुए देशभर के पेंशनरों और वरिष्ठ नागरिकों को आयकर से पूरी तरह मुक्त करने की मांग की है। महासंघ ने कहा है कि यदि पूर्ण छूट संभव नहीं हो तो पेंशनरों के लिए आयकर छूट सीमा कम से कम 25 लाख रुपये वार्षिक तय की जाए।
महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महासंघ की ओर से प्रदेश महामंत्री प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने 8वें वेतन आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर यह मांग रखी है।
ज्ञापन में कहा गया है कि पेंशन कोई अनुग्रह राशि नहीं बल्कि कर्मचारियों द्वारा सेवाकाल में अर्जित “स्थगित वेतन” (Deferred Wage) और उनका संवैधानिक अधिकार है। महासंघ का कहना है कि वर्तमान समय में पेंशनरों की आर्थिक स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। बढ़ती महंगाई, इलाज के बढ़ते खर्च और सीमित आय के कारण वरिष्ठ नागरिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
महासंघ के अनुसार अधिकांश पेंशनरों की आय का मुख्य स्रोत केवल पेंशन है। ऐसे में आयकर कटौती उनकी वास्तविक क्रयशक्ति को प्रभावित कर रही है। संगठन ने कहा कि 8वें वेतन आयोग के बाद यदि पेंशन में बढ़ोतरी होती है तो आयकर का बोझ भी बढ़ जाएगा, जिससे पेंशन वृद्धि का वास्तविक लाभ पेंशनरों तक नहीं पहुंच पाएगा।
महासंघ ने आयोग के समक्ष कई प्रमुख सुझाव भी रखे हैं। इनमें सभी पेंशनरों को पूर्ण आयकर छूट देने, 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पेंशनरों को टैक्स से पूरी राहत प्रदान करने तथा पारिवारिक पेंशन पर कर छूट सीमा बढ़ाकर कम से कम एक लाख रुपये वार्षिक करने की मांग शामिल है।इसके अलावा गंभीर और दीर्घकालिक बीमारियों के इलाज पर अतिरिक्त कर राहत देने तथा पेंशनरों के लिए अलग “सीनियर पेंशनर टैक्स स्लैब” बनाए जाने का सुझाव भी दिया गया है।




