अम्बिकापुर, 28 मई। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने केते एक्सटेंशन कोल परियोजना को मिली केंद्रीय स्वीकृति पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला हसदेव अरण्य के घने जंगलों, लाखों पेड़ों और रामगढ़ पहाड़ की ऐतिहासिक पहचान के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
श्री सिंहदेव ने आज यहां जारी बयान में कहा कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित केते एक्सटेंशन कोल खदान का संचालन अडानी समूह के एमडीओ मॉडल के तहत किया जाना है। उन्होंने दावा किया कि परियोजना के विस्तृत क्षेत्र का करीब 99 प्रतिशत हिस्सा हसदेव अरण्य के संरक्षित और आरक्षित वन क्षेत्र में आता है, जिससे लगभग 1742.6 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी और करीब 7 लाख पेड़ों की कटाई होगी।
उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र सरगुजा के ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ से लगा हुआ है। परियोजना स्थल रामगढ़ के मुख्य मंदिर से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सिंहदेव के मुताबिक आसपास संचालित अन्य कोल परियोजनाओं के कारण पहले से ही रामगढ़ पहाड़ में दरारें और चट्टानों के टूटने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में नई खदान की मंजूरी से पहाड़ और मंदिर के अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 26 जुलाई 22 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में किसी नई कोल परियोजना को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट में भी राज्य सरकार ने शपथ पत्र देकर नई खदानों को गैर जरूरी बताया था।
सिंहदेव ने आरोप लगाया कि इन सबके बावजूद भाजपा सरकार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने परियोजना को मंजूरी देकर विधानसभा के प्रस्ताव और जनता की भावनाओं की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि रामगढ़ पहाड़, मंदिर या वहां तक पहुंचने वाला रास्ता प्रभावित होता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत संबंधित जिम्मेदारों की होगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान हसदेव अरण्य को बचाने के लिए संवैधानिक तरीके से लगातार प्रयास किए गए, लेकिन वर्तमान सरकार एक निजी कंपनी के हित में काम कर रही है। सिंहदेव ने आरोप लगाया कि यह फैसला जनहित नहीं बल्कि कॉर्पोरेट हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।




