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कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. राजाराम त्रिपाठी को मिला “कृषि ऋषि सम्मान”

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कोंडागांव/नोएडा, 03 जून। बस्तर के प्रगतिशील किसान और कृषि विशेषज्ञ डॉ. राजाराम त्रिपाठी को नोएडा में आयोजित एक भव्य समारोह में “कृषि ऋषि सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान वरिष्ठ पत्रकार उदय सिन्हा, अमिताभ अग्निहोत्री तथा पीटीआई डिजिटल के चीफ एडिटर प्रत्यूष रंजन द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।

          समारोह के दौरान डॉ. त्रिपाठी सहित अन्य अतिथियों ने मीडिया क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को भी सम्मानित किया। सम्मान समारोह से पहले “कृषि, स्वास्थ्य, एआई और विकसित भारत-2047” विषय पर आयोजित विशेष विचार गोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

         अपने संबोधन में डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि भारत की बड़ी आबादी कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है, लेकिन मीडिया में कृषि विषयों को अभी भी पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र रोजगार, उद्यमिता और ग्रामीण विकास की दृष्टि से बेहद संभावनाशील है तथा विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में इसकी निर्णायक भूमिका रहेगी।

        डॉ. त्रिपाठी ने अपने चर्चित “नेचुरल ग्रीन हाउस” नवाचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह मॉडल पेड़ों और जैविक संसाधनों पर आधारित एक प्राकृतिक संरचना है, जो बेहद कम लागत में खेती को सुरक्षित और अधिक उत्पादक बनाती है। उनके अनुसार, जहां पारंपरिक पॉलीहाउस स्थापित करने में भारी निवेश की आवश्यकता होती है, वहीं नेचुरल ग्रीन हाउस किसानों को कम खर्च में बेहतर उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन का लाभ उपलब्ध कराता है। यह मॉडल देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

          वरिष्ठ पत्रकार उदय सिन्हा ने कहा कि मीडिया को कृषि और ग्रामीण भारत से जुड़े मुद्दों को अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि लंबे समय तक किसान और कृषि सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में नहीं रहे, जबकि उनकी समस्याओं और जरूरतों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।

         पीटीआई डिजिटल के चीफ एडिटर प्रत्यूष रंजन ने पत्रकारिता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई कंटेंट निर्माण, शोध और डेटा विश्लेषण में महत्वपूर्ण सहयोगी साबित हो रहा है। हालांकि इसके उपयोग के दौरान फैक्ट-चेक, बायस-चेक और संपादकीय निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई पत्रकारिता का विकल्प नहीं, बल्कि पत्रकारों की क्षमता और कार्यकुशलता को बढ़ाने वाला प्रभावी उपकरण है।

         कार्यक्रम में वक्ताओं ने विकसित भारत-2047 के निर्माण में कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक और जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

         सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने यह सम्मान मां दंतेश्वरी हर्बल समूह, बस्तर की पवित्र धरती तथा क्षेत्र के आदिवासी समाज को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि बस्तर की जैविक खेती, आदिवासी परंपराओं, प्रकृति आधारित जीवनशैली और ग्रामीण भारत की सामूहिक शक्ति का सम्मान है। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों के सहयोग और विश्वास ने ही उन्हें कृषि नवाचारों के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।