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राज्यपाल रमेन डेका ने अवैध रेत उत्खनन पर जताई चिंता

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रायपुर, 03 जून। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने प्रदेश की नदियों और बड़े नालों में हो रहे अवैध एवं अनियंत्रित रेत उत्खनन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को इस पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने तथा रेत खनन को वैज्ञानिक और नियोजित तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए हैं।

      लोक भवन में आयोजित एक बैठक के दौरान राज्यपाल ने खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद के साथ रेत खनन की वर्तमान स्थिति और उससे जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि रेत राज्य के विकास और आधारभूत संरचना निर्माण के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है, लेकिन इसके अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण और जल संसाधनों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

     लोकभवन की विज्ञप्ति के अनुसार राज्यपाल ने कहा कि अवैध रेत उत्खनन के कारण नदियों का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। नदी तल में अत्यधिक खुदाई से जलधारण क्षमता कम होती है, भू-जल स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और नदी किनारों पर कटाव की समस्या बढ़ती है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में जलस्रोतों के सूखने तथा जैव विविधता पर खतरा उत्पन्न होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

      उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नदियों और बड़े नालों की जल क्षमता बढ़ाने तथा भू-जल संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। इसके लिए रेत खनन क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाना चाहिए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाया जा सके।

      राज्यपाल डेका ने निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ संस्थानों की सहायता ली जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि तकनीकी सर्वेक्षण और अध्ययन के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों, जैसे आईआईटी की सेवाएं भी ली जा सकती हैं।

     उन्होंने अधिकारियों को अवैध उत्खनन पर कड़ी निगरानी रखने, खनन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि रेत का उपयोग विकास कार्यों के लिए आवश्यक है, लेकिन इसका दोहन निर्धारित नियमों और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप ही होना चाहिए।