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पावर ट्रांसमिशन कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट करने के फैसले पर कांग्रेस का विरोध

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रायपुर, 09 जून। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की पावर ट्रांसमिशन कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के निर्णय का कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार इस कदम के जरिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को धीरे-धीरे निजीकरण की दिशा में ले जाने का प्रयास कर रही है।

     श्री शुक्ला ने यहां जारी बयान में कहा कि छत्तीसगढ़ की विद्युत कंपनियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और राज्य के पास बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि बिजली के ट्रांसमिशन और वितरण का कार्य करने वाली कंपनी के शेयर बाजार में आने से निजी निवेशकों और उद्योगपतियों की हिस्सेदारी बढ़ेगी, जिससे सरकारी नियंत्रण कमजोर हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में इस कंपनी को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।

     कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सरकार द्वारा कंपनी के शेयर जारी करने का उद्देश्य राज्य की विद्युत व्यवस्था में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की जनता और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित हो सकते हैं।

     इसके साथ ही शुक्ला ने मंत्रिमंडल द्वारा खरीफ सीजन में धान के अलावा अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे किसानों को भ्रमित करने वाला फैसला बताते हुए कहा कि राज्य के अधिकांश किसान खरीफ सीजन में धान की खेती करते हैं और उनकी आजीविका मुख्य रूप से इसी फसल पर निर्भर है।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या खाद और उर्वरकों की उपलब्धता की है। सरकार को पहले किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया और डीएपी की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि सहकारी समितियों तक पर्याप्त खाद कब तक पहुंचेगी।

    कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश की जलवायु और मानसून की स्थिति धान की खेती के लिए अधिक अनुकूल है, जबकि दलहन, तिलहन और अन्य फसलों के लिए न तो किसानों की व्यापक तैयारी है और न ही पर्याप्त आधारभूत व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में प्रोत्साहन राशि की घोषणा से अधिक जरूरी किसानों की मौजूदा समस्याओं का समाधान करना है।