अयोध्या, 29 जून। रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा और दान सामग्री में कथित अनियमितताओं के मामले ने अब कानूनी और सामाजिक स्तर पर नया मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण में अयोध्या बार एसोसिएशन ने एक अहम निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि मामले में गिरफ्तार किसी भी आरोपी की ओर से बार का कोई भी अधिवक्ता पैरवी नहीं करेगा। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई वकील इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
सोमवार को बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राम मंदिर के चढ़ावे और दान सामग्री में कथित गड़बड़ी की कड़े शब्दों में निंदा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया गया कि बार का कोई भी सदस्य इस मामले में आरोपियों की ओर से अदालत में पेश नहीं होगा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री मिश्रा ने बताया कि यह फैसला सभी अधिवक्ताओं पर समान रूप से लागू होगा। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ और कनिष्ठ, दोनों श्रेणी के अधिवक्ता इस मामले में आरोपियों की पैरवी से दूर रहेंगे। यदि कोई अधिवक्ता एसोसिएशन के निर्णय की अवहेलना करता है तो उसके विरुद्ध 5 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाने की कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने ट्रस्ट से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राय के खिलाफ भी नाराजगी जताई। बैठक में यह ऐलान किया गया कि यदि तीन दिनों के भीतर ये लोग अयोध्या नहीं छोड़ते हैं तो व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अयोध्या जाम करने की भी रणनीति अपनाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि राम मंदिर के चढ़ावा प्रकरण में सामने आए विवाद के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ट्रस्ट से इस्तीफा दे चुके हैं। मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है और इस सिलसिले में चंपत राय से पूछताछ भी हो चुकी है। वहीं, मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।




