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तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति : राज्यपाल डेका

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रायपुर, 05 जुलाई। राज्यपाल रमेन डेका ने पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और देश के लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

    अपने शोक संदेश में राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी विलक्षण गायन शैली, अद्भुत कला-साधना और लोक परंपराओं के संरक्षण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने पंडवानी जैसी प्राचीन लोकगायन परंपरा को विश्व मंच तक पहुंचाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया और भारतीय लोककला को नई ऊंचाइयों पर स्थापित किया।

     राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोककला की साधना, संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनका असाधारण व्यक्तित्व, कला के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। लोककला के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

    उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों तथा समूचे लोककला जगत को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।