रायपुर, 12 जुलाई। छत्तीसगढ़ में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण अभियान की समीक्षा के लिए शनिवार को रायपुर स्थित बेबीलॉन कैपिटल में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने की। इसमें राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं तथा निवेश को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन भी सुनिश्चित किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान का उद्देश्य केवल पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से समय पर पौधरोपण, नियमित सिंचाई और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की अपील की। साथ ही पीपल, नीम, शिरीष, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने सभी औद्योगिक इकाइयों को 31 जुलाई तक निर्धारित वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करने और 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा अभियान की ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए पोर्टल पर समयबद्ध जानकारी दर्ज करना अनिवार्य बताया।
श्री चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत भी व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने और जनभागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया।
बैठक में मंत्री ने बताया कि नवा रायपुर को “पीपल सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पहले लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अलावा अगले पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध लेक के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू हो चुका है। इस परियोजना से करीब 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी। झील के बीच स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जहां प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक “बर्ड आइलैंड” विकसित किया जा रहा है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष अंकित आनंद ने बताया कि पिछले एक वर्ष में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण हो चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा और सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन जानकारी अपलोड करनी होगी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के लिए 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे उद्योगों के सहयोग से 30 लाख से अधिक तक पहुंचाया जा सकता है। साथ ही 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है, हालांकि मंडल का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना है।




