नई दिल्ली, 21 जुलाई। संसद मार्च के दौरान छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई के एक दिन बाद भी राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का जोर कम नहीं हुआ। मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और समर्थक प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे, जिससे शाम तक जंतर-मंतर पूरी तरह भर गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की सख्ती से आंदोलन कमजोर होने के बजाय और मजबूत हुआ है तथा वे अपनी मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे।
बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस ने शाम करीब पांच बजे संसद मार्ग की ओर जाने वाला रास्ता बंद कर दिया और लोगों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की। प्रदर्शनकारियों के अनुसार जनपथ की ओर जाने वाले मार्ग पर भी आवाजाही सीमित कर दी गई, जबकि संसद मार्ग थाने के सामने से केरल हाउस की ओर जाने वाला रास्ता खुला रहा।
प्रदर्शन स्थल पर लगातार भाषण, नारेबाजी और विरोध कार्यक्रम चलते रहे। छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब यह आंदोलन केवल कथित पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यापक मुहिम बन चुका है।
सोमवार को संसद मार्च में शामिल रहीं दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा साक्षी चंदा ने कहा कि पुलिस कार्रवाई ने छात्रों के संकल्प को और मजबूत किया है। उनके अनुसार आंदोलन कई लोगों के संघर्ष और त्याग से खड़ा हुआ है, इसलिए जब तक उनकी आवाज नहीं सुनी जाएगी, विरोध जारी रहेगा।
साक्षी की मां ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर कहा कि यह बच्चों के भविष्य का सवाल है और ऐसे समय में अभिभावकों का उनके साथ खड़ा होना आवश्यक है। उनका कहना था कि छात्र अपनी शिक्षा और करियर से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, इसलिए उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में पहुंचे। गाजियाबाद से आए एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई आंदोलनकारियों का मनोबल तोड़ने में असफल रही है। उनका दावा था कि बल प्रयोग के बाद आंदोलन को और अधिक समर्थन मिल रहा है क्योंकि लोगों को छात्रों के साथ अन्याय महसूस हो रहा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने का सिलसिला भी लगातार जारी रहा। कई सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों के साथ कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने भी छात्रों को भोजन के पैकेट वितरित किए और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
इस बीच विपक्षी नेताओं का भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचना जारी रहा। एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार, सांसद सुप्रिया सुले, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत और अरविंद सावंत, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल तथा सांसद संजय सिंह ने जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनके आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की लड़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा।




