(सन्तोष यादव)
सुलतानपुर, 23 जुलाई। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में सुलतानपुर में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन धरने से पहले गुरूवार को प्रशासन और विपक्ष के बीच तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। पूर्व विधायक अनूप संडा द्वारा तिकोनिया पार्क में धरना आयोजित करने की घोषणा के बाद प्रशासन ने उन्हें बीएनएसएस की धारा-163 के तहत नोटिस जारी कर घर से बाहर नहीं निकलने का निर्देश दिया। इसके बावजूद जब वह समर्थकों के साथ प्रदर्शन के लिए निकले तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया।
जानकारी के अनुसार, पूर्व विधायक अनूप संडा ने 22 जुलाई को उपजिलाधिकारी को पत्र देकर 23 जुलाई को सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक तिकोनिया पार्क में शिक्षा, रोजगार और लोकतंत्र बचाओ के समर्थन में शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरना आयोजित करने की सूचना दी थी। प्रशासन ने प्रस्तावित कार्यक्रम को कानून-व्यवस्था के लिए संभावित चुनौती बताते हुए नोटिस जारी किया और किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन से दूर रहने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी गई कि आदेश का उल्लंघन करने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
गुरूवार को अनूप संडा अपने समर्थकों के साथ आवास से बाहर निकले और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने लगे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उनके साथ ज्ञान प्रकाश यादव, त्रियुगी यादव, विकास चौरसिया, जमीरुद्दीन हाशमी सहित कई महिला समर्थकों को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। पूरे घटनाक्रम को देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
हिरासत में लिए जाने से पहले अनूप संडा ने सोशल मीडिया पर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए लिखा कि उनके घर के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया और दरवाजे पर नोटिस चस्पा कर दिया गया। उन्होंने पूछा कि 56 बार रक्तदान करने वाला व्यक्ति क्या जनमानस की जान-माल के लिए खतरा हो सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि उनका पुलिस से कोई टकराव नहीं है और पुलिस अपना दायित्व निभा रही है, लेकिन उन्हें लोक व्यवस्था के लिए खतरा बताया जाना उनके लिए अपमानजनक और पीड़ादायक है।
अपनी पोस्ट के अंत में अनूप संडा ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रसिद्ध पंक्तियां भी साझा कीं—
“समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।”




