कबीरधाम, 28 जुलाई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सोमवार को अपनी पत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ विश्वप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की और मंदिर की परिक्रमा करते हुए प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान पंच दिवसीय ‘महा चतुर शुद्धि सहस्र कलशम् महाअनुष्ठान’ में भी भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर उन्होंने छत्तीसगढ़ की उन्नति, सामाजिक सद्भाव और लोकमंगल की प्रार्थना की।
श्री साय ने कहा कि भोरमदेव धाम छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का गौरवशाली प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के महाअनुष्ठान न केवल प्राचीन वैदिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, आपसी सद्भाव और लोककल्याण की भावना को भी मजबूत करते हैं।
उन्होंने बताया कि 30 जुलाई से भगवान शिव की आराधना का पवित्र श्रावण मास प्रारंभ हो रहा है। पिछले दो वर्षों की तरह इस वर्ष भी वे उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के साथ भोरमदेव धाम पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा भारतीय संस्कृति और आस्था की जीवंत परंपरा का प्रतीक है।
उल्लेखनीय है कि श्री महादिव्य देशम फाउंडेशन के तत्वावधान में 25 जुलाई से शुरू हुआ यह पंच दिवसीय महाअनुष्ठान कबीरधाम सहित पूरे छत्तीसगढ़ के सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक कल्याण की कामना के साथ आयोजित किया जा रहा है। फाउंडेशन के प्रमुख राजीव राकुल स्वामी (केरल) के अनुसार यह अनुष्ठान प्राण-प्रतिष्ठित मंदिरों के शुद्धिकरण और दिव्य ऊर्जा के पुनर्संचार की प्राचीन वैदिक परंपरा पर आधारित है, जिसे भगवान परशुराम स्रोतम और आगम शास्त्रों में वर्णित विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया जा रहा है।
इस अवसर पर पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, वैदिक आचार्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




