नई दिल्ली, 29 जुलाई। लोकसभा ने बुधवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। नए कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित गतिविधियों पर पहले से अधिक कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सदन में हंगामा हुआ, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही दो बार कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से चर्चा का जवाब दिया, जिसके बाद सदन ने विधेयक को मंजूरी दे दी।
संशोधित कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले दोषियों को कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा तथा 50 लाख तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि अपराध संगठित गिरोह से जुड़ा पाया जाता है, तो न्यूनतम 7 वर्ष की जेल और 10 करोड़ तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
विधेयक में जांच प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाया गया है। इसके अनुसार ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा किया जा सके।
चर्चा का जवाब देते हुए राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच सीबीआई को सौंपी थी। उन्होंने बताया कि मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। उनका कहना था कि नए कानून के लागू होने के बाद परीक्षा संबंधी अपराधों पर और अधिक प्रभावी तथा त्वरित कार्रवाई संभव होगी।




