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‘सत्याग्रह’ पुस्तक का विमोचन, डॉ. रमन सिंह बोले— जल-जंगल के संघर्ष और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का महत्वपूर्ण दस्तावेज

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रायपुर, 2 अगस्त। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने शनिवार शाम शंकर नगर स्थित अपने निवास कार्यालय में साहित्यकार एवं पत्रकार स्वर्गीय आशीष सिंह की पुस्तक ‘सत्याग्रह’ का विमोचन किया। कार्यक्रम का आयोजन हरि ठाकुर स्मारक संस्थान, रायपुर द्वारा किया गया।

समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने की। इस अवसर पर राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा, साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष शशांक शर्मा, पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू, स्वर्गीय आशीष सिंह के पुत्र उपमन्यु सिंह एवं अभिमन्यु सिंह सहित अनेक साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

पुस्तक का विमोचन करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ‘सत्याग्रह’ छत्तीसगढ़ में जल-जंगल के अधिकारों की रक्षा के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा किए गए ऐतिहासिक आंदोलनों का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुए संघर्षों को विस्तार से प्रस्तुत करती है और बस्तर से लेकर राजनांदगांव तथा धमतरी के कंडेल नहर सत्याग्रह तक की घटनाओं को प्रभावी ढंग से सामने लाती है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव के आग्रह पर महात्मा गांधी धमतरी आए थे, जहां कंडेल नहर सत्याग्रह ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। डॉ. सिंह ने राजनांदगांव जिले के बादराटोला के शहीद रामाधीन गोंड, त्यागमूर्ति स्वर्गीय प्यारे लाल सिंह तथा स्वर्गीय हरि ठाकुर सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भी स्मरण किया।

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि यह पुस्तक जल-जंगल के संघर्षों की शताब्दी के अवसर पर प्रकाशित एक महत्वपूर्ण कृति है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय आशीष सिंह ने इसमें धमतरी के कंडेल नहर सत्याग्रह, नत्थूजी जगताप, नारायण राव मेघावाले, शहीद रामाधीन गोंड और पंडित सुंदरलाल शर्मा जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का विस्तृत एवं तथ्यपरक वर्णन किया है। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन के लिए हरि ठाकुर स्मारक संस्थान को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष शशांक शर्मा तथा साहित्यकार वीरेन्द्र बहादुर ने भी पुस्तक और उसके ऐतिहासिक महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।