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महिला आरक्षण पर चिदंबरम का रिजिजू पर पलटवार, बोले-2029 से पहले लागू हो सकता है आरक्षण

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नई दिल्ली, 9 अगस्त। महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर पलटवार किया है। चिदंबरम ने कहा कि लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान कानून में पहले से मौजूद है और इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन से जोड़ना जरूरी नहीं है।

चिदंबरम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण का प्रावधान संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत पहले ही कानून का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस मुद्दे पर यही बात कह चुके हैं।

जनगणना और परिसीमन से जोड़ना अनावश्यक: चिदंबरम

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि इस संबंध को समाप्त कर दिया जाए तो महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से काफी पहले लागू किया जा सकता है।

चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस ने वर्ष 2023 में ही सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया था, लेकिन सरकार अपने निर्णय पर कायम रही। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के पीछे सरकार का एक ‘छिपा एजेंडा’ है।

रिजिजू के बयान को बताया गलत

पी. चिदंबरम ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस कथित बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें महिला आरक्षण को तत्काल लागू नहीं किए जाने की बात कही गई थी। चिदंबरम ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि महिला आरक्षण को अभी लागू नहीं किया जा सकता।

उन्होंने दोहराया कि महिला आरक्षण कानून में पहले से मौजूद है। उनके अनुसार, यदि इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ने वाली शर्त को हटा दिया जाए तो 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।

क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित होकर संविधान के 106वें संशोधन के रूप में कानून बना था।

हालांकि, कानून में आरक्षण के प्रभावी होने की प्रक्रिया को जनगणना के बाद परिसीमन से जोड़ा गया है। इसी प्रावधान को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक मतभेद बना हुआ है।

केंद्र सरकार का पक्ष है कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने पर ही महिला आरक्षण लागू हो सकेगा। वहीं, कांग्रेस का तर्क है कि महिला आरक्षण को इन दोनों प्रक्रियाओं से अलग कर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही लागू किया जा सकता है।

महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच यह राजनीतिक बहस आने वाले समय में और तेज होने के आसार हैं।