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नशे के कारोबार की कमर तोड़ने वित्तीय जांच पर पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण

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रायपुर 30 सितम्बर। पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में नारकोटिक्स से जुड़े दर्ज प्रकरणों की वित्तीय जांच (फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन) को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में नारकोटिक्स अपराधों से अर्जित अवैध संपत्ति की पहचान, वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने और उसे ध्वस्त करने के लिए जांच की आधुनिक तकनीकों पर अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, नारकोटिक्स अमित कुमार ने कहा कि नारकोटिक्स मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने के साथ-साथ उनकी अवैध रूप से अर्जित परिसंपत्तियों को जब्त कर पूरे वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना जरूरी है। इसके लिए प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से विवेचना किए जाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों को वित्तीय जांच के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।

उन्होंने कहा कि नारकोटिक्स पदार्थ की आपूर्ति करने वाले और उसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के बीच फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक स्थापित कर वित्तीय जांच को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इससे नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े आर्थिक लेन-देन और वित्तीय नेटवर्क की पहचान कर उसे प्रभावी रूप से ध्वस्त करने में मदद मिल सकती है।

उप पुलिस महानिरीक्षक, नारकोटिक्स पारुल माथुर ने कहा कि एनडीपीएस मामलों की विवेचना में विभिन्न संबंधित एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसमें अपराधियों द्वारा नशे के कारोबार से अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करना भी शामिल है। इसी उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों को एनडीपीएस मामलों में वित्तीय जांच की दिशा में संवेदनशील एवं प्रशिक्षित करने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई।

उन्होंने नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए सप्लाई रिडक्शन, डिमांड रिडक्शन, हार्म रिडक्शन और रिहेबिलिटेशन के बीच समन्वित एवं समग्र दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर दिया।

कार्यशाला के प्रथम सत्र में आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग, रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश चंद्र चौहान ने विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने नारकोटिक्स मामलों में वित्तीय जांच के माध्यम से अवैध धन के स्रोत और उसके निवेश के स्थानों का पता लगाने की प्रक्रिया के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्तीय लेन-देन और उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण कर नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क तक कैसे पहुंचा जा सकता है।

द्वितीय सत्र में नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड नारकोटिक्स (NACIN), रायपुर में पदस्थ एडिशनल असिस्टेंट डायरेक्टर सलमान इम्तियाज हुसैनी ने जीएसटी से संबंधित आंकड़ों और सूचनाओं के विश्लेषण के माध्यम से अवैध धन का पता लगाने के तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला में प्रदेशभर से उप पुलिस अधीक्षक से लेकर सहायक उप निरीक्षक स्तर तक के कुल 70 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को नारकोटिक्स मामलों में वित्तीय जांच को विवेचना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने तथा अवैध धन और संपत्तियों तक पहुंचने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर पुलिस मुख्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनामिका जैन ने किया।