रायपुर, 11 अगस्त। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा सरकार पर स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत कांग्रेस शासनकाल में नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई थी।
श्री शुक्ला ने आज यहां जारी बयान में कहा कि भाजपा यह दावा कर रही है कि राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत कांग्रेस शासनकाल में हुई थी, जबकि वास्तविकता यह है कि 14 जून 24 को भाजपा शासनकाल में राज्य का पहला स्मार्ट मीटर लगाया गया था। उन्होंने बताया कि भिलाई-3 स्थित सीएसईबी कॉलोनी में पहला स्मार्ट मीटर लगाया गया। स्मार्ट मीटर लगाने के लिए अनुबंध, ठेका और कंपनी के चयन की प्रक्रिया भी भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही पूरी की गई।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार ने पूरे देश में स्मार्ट मीटर लगाने की कार्ययोजना बनाई है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने राज्यों और विद्युत मंडलों से इसके लिए सैद्धांतिक सहमति मांगी थी, लेकिन उस समय यह स्पष्ट नहीं किया गया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं की बिजली खपत और बिल में कितना अंतर आएगा।
श्री शुक्ला ने कहा कि जब यह स्पष्ट हो गया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल अधिक आ रहे हैं, तो राज्य सरकार इन्हें वापस लेने की दिशा में कदम क्यों नहीं उठा रही है। उन्होंने सरकार से स्मार्ट मीटर को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार को उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार स्मार्ट मीटर वापस लेने पर विचार करना चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बिजली उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर थोपना चाहती है और इसी वजह से सरकार स्मार्ट मीटर की वापसी के सवाल पर मौन है।




