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संसद का मानसून सत्र हंगामे के साथ समाप्त, लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

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नई दिल्ली, 13 अगस्त। संसद का मानसून सत्र गुरुवार को हंगामे और नारेबाजी के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित कार्यक्रम से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। 20 जुलाई से शुरू हुआ यह सत्र 13 अगस्त तक चलना था और कुल 19 बैठकें निर्धारित थीं।

     सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा पहुंचे। अमित शाह की सदन में मौजूदगी खास तौर पर चर्चा में रही, क्योंकि सत्र शुरू होने के बाद गुरुवार को पहली बार वह लोकसभा में दिखाई दिए। हालांकि, सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच इसे स्थगित कर दिया गया।

    कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सदन में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की सभी छह कड़ियां प्रस्तुत की गईं और कुछ समय के लिए माहौल शांत हुआ। इसके तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।

सरकार और विपक्ष के बीच पूरे सत्र में टकराव

     मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी राजनीतिक तकरार देखने को मिली। विपक्षी दलों ने छात्र आंदोलनों और अन्य मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हुए संसद में चर्चा की मांग की। राम मंदिर से जुड़े कथित चंदे के सवालों सहित कई मुद्दों को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की।

     विपक्षी सांसदों ने ‘चंदा किसने लूटा’ और ‘अमित शाह सदन में आओ’ जैसे नारे लगाए। दूसरी ओर, एनडीए सांसदों ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए ‘राहुल गांधी जवाब दो’ जैसे नारे लगाए। इस दौरान संसद परिसर में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच कई बार आमने-सामने की स्थिति बनी।

अमित शाह ने चर्चा के लिए सरकार की तैयारी बताई

    सत्र के अंतिम चरण में सरकार की ओर से विपक्ष के उठाए मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार होने का दावा किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में चर्चा के लिए समय निर्धारित करने का आग्रह किया था। शाह ने विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है।

    हालांकि, विपक्ष का कहना था कि सरकार को पहले उन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, जिनको लेकर सांसद लगातार विरोध कर रहे हैं। इसके चलते अंतिम दिन भी सदन में गतिरोध खत्म नहीं हो सका।

टी पार्टी में भी विपक्ष की दूरी

     सत्र के समापन के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से संसद भवन में आयोजित चाय समारोह में कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के कई विपक्षी दल शामिल नहीं हुए। संसद सत्र के समापन पर अध्यक्ष की ओर से इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन सामान्य संसदीय परंपरा का हिस्सा रहा है।

     कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुए विरोध-प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि सत्ताधारी दल के नेता भी प्रदर्शन कर रहे हैं।

     इस तरह 20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को लगातार राजनीतिक गतिरोध और हंगामे के बीच समाप्त हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र के शुभारंभ पर संसद में सार्थक चर्चा और सुचारु कामकाज की उम्मीद जताई थी, लेकिन पूरे सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा।