रायपुर, 29 अगस्त। छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था के निजीकरण की कथित तैयारी को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले ही बिजली के दाम बढ़ाकर और 400 यूनिट तक मिलने वाली राहत समाप्त कर आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ा चुकी है। अब विद्युत कंपनी के शेयर बेचने और निजी कंपनियों को बिजली सप्लाई का ठेका देने की तैयारी की जा रही है, जो जनता के हितों के खिलाफ है।
श्री बैज ने आज यहां जारी बयान में कहा कि छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था और विद्युत कंपनी को प्रदेश की जनता के खून-पसीने की कमाई से खड़ा किया गया है। ऐसे में सरकारी बिजली व्यवस्था को कमजोर कर उसे निजी हाथों में सौंपने की कोशिश जनता के साथ सीधा विश्वासघात है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी बिजली कंपनी प्रदेश के लोगों को बिजली उपलब्ध करा रही है, तो उसे कमजोर कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिजली हर परिवार, किसान, मजदूर और छोटे व्यवसाय की बुनियादी जरूरत है। बिजली व्यवस्था का निजीकरण होने पर इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ने से भविष्य में बिजली की दरों में वृद्धि का रास्ता और आसान हो जाएगा।
श्री बैज ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही बिजली के दाम बढ़ा चुकी है। इसके अलावा 400 यूनिट तक मिलने वाली राहत को समाप्त किया गया है। स्मार्ट मीटर को लेकर भी उपभोक्ताओं के बीच चिंता बनी हुई है। ऐसे में सरकारी बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की कवायद से यह सवाल उठता है कि सरकार की प्राथमिकता आम जनता को सस्ती और सुचारु बिजली उपलब्ध कराना है या निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाना।
दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस बिजली व्यवस्था के निजीकरण का पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने सरकार से विद्युत कंपनी के शेयर बेचने तथा निजी कंपनियों को बिजली सप्लाई का ठेका देने की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था जनता की संपत्ति है और इसे किसी निजी कंपनी के लिए कमाई का जरिया नहीं बनने दिया जा सकता। कांग्रेस इस मुद्दे पर जनता के हितों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी।
श्री बैज ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि बिजली व्यवस्था के निजीकरण से आखिर किसे फायदा होगा और यदि इसका भार आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है तो उसकी कीमत छत्तीसगढ़ की जनता क्यों चुकाएगी।




